
लालबर्रा।
लालबर्रा क्षेत्र अंतर्गत सरराटी जलाशय की मुख्य नहर व उसके अन्य माईनर (छोटे फाटे) में घास पूस झाड़ी उग गई है एवं कई जगह से टूट फूट गड्ढे हो गए हैं एवं किसानों के खेत में पानी जाने के लिए जो मोनघ कुलापे लगे हैं वे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। किसानों को अपने खेत में सरलता से पानी पहुंचाने में काफी परेशानी होती है और यह नहर का काफी सालों से अच्छे ढंग से साफ सफाई एवं सुधार कार्य नहीं हुआ है। अंग्रेजों के जमाने से बनी है यह नहर तब से अभी तक अच्छे ढंग से सुधार कार्य आज तक नहीं हुआ है। छोटे-मोटे सुधार कार्य तो होते रहते हैं, किसानों की माली हालत बहुत ही खराब है। उक्त नहर से लगभग 40 गांव के किसानों को फसल उत्पादन करने में इस नहर का पानी सहायक है। टेकाड़ी, चीचगांव, साल्हे, खैरगोनदी, बोरीटोला,बोरी, बकोड़ा, मानपुर,धरपीवाड़ा, चितालटोला,मरेरा,खुरसोडी,गारापुरी, खमरिया,नैतरा व अन्य कुल लगभग 40 गांव के किसान इस नहर से पानी चलाते हैं। जिससे कि किसान अच्छा उत्पादन ले सके, और अपनी आय बढ़ाकर अपनी खराब हालत को सुधारते हुए अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सके। उक्त नहर के सुधार कार्य के लिए विगत 2 वर्षों से प्रयासरत है पूर्व जनपद अध्यक्ष व किसान हितैषी युवा नेता डुलेंद्र (मुन्ना) ठाकरे। एक दो माह पूर्व भी सराठी जलाशय संघर्ष समिति डुलेनद्र (मुन्ना) ठाकरे ने किसानों के हित में सैकड़ों किसानों के साथ इस विषय को लेकर आवाज बुलंद करते हुए आंदोलन भी किया था। क्षेत्र के किसान दबी जुबान से कहते हैं कि हमारे क्षेत्रीय विधायक गौरीशंकर बिसेन (गौरी भाऊ) चाहते तो इससे पहले भी यह नहर को बनवा सकते थे लेकिन उन्होंने गंभीरता से इस विषय पर ध्यान नहीं दिया, ना ही संबंधित विभाग ने किसानों की सुध ली, सिर्फ नहर के पानी का पैसा बराबर वसूलते रहा जल संसाधन विभाग। लेकिन अब विधायक ने ध्यान दिया है किसानों का कहना है कि यह नहर पक्की बने या कच्ची लेकिन अच्छे से सुधार कार्य होना चाहिए जंगल झाड़ी ना रहे, टूट-फूट ना रहे, भले ही कच्ची रहे लेकिन सुव्यवस्थित ढंग से अच्छी और मजबूत बनना चाहिए। और अतिरिक्त जहां आवश्यक हो किसानों की सलाह से मोनघ कुलापे लगाना चाहिए। कुछेक किसानों ने मीडिया के कैमरे के सामने खुलकर भी इस नहर को बनाने को लेकर खुल्ला खुल्ला बोला है। किसानों ने बताया कि सुनने में आ रहा है कि यह नहर पक्की बनने का टेंडर आ गया है लगभग 27 करोड़ की लागत से बनना है ऐसा जानकारी लग रही है और फिलहाल संबंधित विभाग किसानों को वर्तमान में गेहूं चना अलसी की फसल में पानी देने से मना कर रहा है जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा। विभाग विचार-विमर्श कर किसानों की खराब हालत का ध्यान रखते हुए वर्तमान में गेहूं चना की फसल के लिए पानी दे और जब नहर बनने का टेंडर लग जाएगा जब निर्माण प्रारंभ होगा तब पानी देना बंद कर दे ताकि किसानों का नुकसान ना हो और नहर भी बन जाए।— “लालबर्रा क्षेत्र की राजनीति में सत्ता पक्ष यदि किसी विषय पर ध्यान नहीं देता तो विपक्ष भी चुपचाप चुप्पी साधे बैठा हुआ रहता है। क्योंकि लालबर्रा में सत्तापक्ष और विपक्ष सब के सब चोर- चोर मौसेरे भाई हैं। अन्य दूसरे विषय को लेकर भी आप देखें तो लालबर्रा की राजनीति सबके आपसी गठजोड़ व मिलीभगत से सब काम फलते- फूलते हैं।” “अपना काम बनता भाड़ में जाये जनता” — यदि सत्तापक्ष किसान मजदूर गरीब जनता के हित में किसी विषय को लेकर ध्यान नहीं देता तो विपक्ष क्यों चुप रहता है? सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों चुप इसको कहते हैं लालबर्रा।
“रवि अग्रवाल ने कहा कि मैं इस नहर को बनवाने के लिए नेताओं का ध्यानाकर्षण कराते हुए 20 साल से प्रयासरत हूं जो कि किसान हित में पक्की नहर बने और किसान अच्छी व अधिक फसल उत्पादन कर सके और अपनी आय बढ़ा सकें, लेकिन सब नेता आते हैं जाते हैं और चुनाव के समय लॉली पॉप देकर किसानों को झुनझुना थमाते हुए चले जाते हैं।”
इनका कहना है –
नहर का टेंडर हो गया है ओपन होना बाकी है 25 करोड़ 69 लाख की लागत से बनाई जाएगी। लगभग एक माह में निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। फिलहाल किसानों को असुविधा हो सकती है लेकिन भविष्य में सुविधा ही मिलेगी।
नागेंद्र सिंह ठाकुर
जल संसाधन विभाग बालाघाट।


