भोपाल मप्र वन मुख्यालय भवन के एक ब्लॉक के बेचे गए तीन फ्लोर फिर से वन विभाग को वापस किए जाएंगे। इन फ्लोर खरीदने वाले विभागों को शासन की ओर से राशि वापस लौटाने के लिए वित्त विभाग ने अपनी सहमति दे दी है। पिछले साल राज्य शासन ने लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (पाम) के जरिए लगभग 59 करोड़ रुपए में यह तीनों फ्लोर तीन अलग-अलग सरकारी निकायों को नीलामी के जरिए बेच दिए थे।
छह माह पहले इनकी रजिस्ट्री भी शासन ने करा दी थी। यह राशि वन विभाग को न देकर लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग ने सीधे वित्त विभाग शासन के मद में सौंप दी थी। वित्त विभाग की सहमति के बाद नीलामी में वन भवन में हिस्सा खरीदने वाले सरकारी निकायों को उनकी धनराशि वापस करने का रास्ता साफ हो गया है। इसलिए रजिस्ट्री और नीलामी प्रक्रिया को निरस्त करने का प्रस्ताव कैबिनेट में भेजा जाएगा।
बढ़ी लागत के 23 करोड़ रुपए की वसूली के लिए बैस ने बेचने के निर्देश दिए थे …
शिवराज सरकार में बनकर तैयार हुए वन भवन को 159 करोड़ रुपए में बनकर तैयार होना था, लेकिन निर्माण में देरी से इसकी लागत 182 करोड़ रुपए बढ़ गई थी। बढ़ी हुई लागत के 23 करोड़ की वसूली के लिए तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने वन भवन के एक हिस्से को बेचने के निर्देश जारी कर दिए थे।
59 करोड़ में वन भवन के ई-ब्लॉक के तीन फ्लोर को श्रम विभाग के कर्मकार कल्याण मंडल, स्टेट इलेक्ट्रानिक्स डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड और स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन को बेच दिया गया था। लेकिन अगस्त 2023 में तत्कालीन वन मंत्री विजय शाह की मांग पर तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने पूरा वन भवन वन विभाग के पास ही रहने की घोषणा कर दी। लेकिन विस चुनाव की आचार संहिता लगने के कारण इस पर कोई फैसला नहीं हुआ।
नए मुख्य सचिव के आने पर विभाग ने प्रस्ताव भेजा
मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने तीनों खरीदारों के नाम रजिस्ट्री कराकर जल्द से जल्द पजेशन सौंपने के आदेश चुनाव के बीच जारी कर दिए थे। तत्कालीन मुख्य सचिव के दबाव के कारण किसी भी अधिकारी ने इस मामले में वन विभाग का साथ नहीं दिया था। लेकिन नए मुख्य सचिव अनुराग जैन के आने के बाद इस वन विभाग ने दोबारा वन भवन पर अपना हक जताते हुए शासन को वन विभाग के एक ब्लॉक की नीलामी और बिक्री निरस्त करने का प्रस्ताव भेजा था।
वन अफसरों ने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के मंत्री विजय शाह के जरिए वन विभाग के अधिकारियों ने अपनी बात नए सिरे से राज्य शासन के सामने रखी। दोनों ही पूर्व में वन मंत्री रह चुके हैं, इसलिए शुक्ल और शाह दोनों भी यही चाहते हैं कि पूरा वन भवन वन विभाग के पास ही रहे।
कैबिनेट में सहमति तय
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक अब वन भवन के तीन फ्लोर की रजिस्ट्री कैंसिल कराने का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट इस पर फैसला लेने के लिए लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग से अभिमत ले सकता है।
लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (पाम) का जिम्मा वर्तमान में लंबे समय तक वन मंत्री रह चुके विजय शाह के पास है, इसलिए पास की सहमति मिलना पहले से ही तय है। वन विभाग को पूरा वन भवन मिलने के बाद किराए पर चल रहे वन विभाग के तीन स्वतंत्र निकाय राज्य जैव विविधता बोर्ड, राज्य बांस मिशन, बांस बोर्ड और ईको टूरिज्म बोर्ड को भी वन भवन में लाया जा सकेगा।





