“जब सैंया कोतवाल तो डर काहे का!”
बिलासपुर में खुलेआम अवैध कोयला डिपो का खेल, जीपीएस निकालकर होती है लाखों के कोयले की कटिंग?
उमरिया /बिलासपुर।जिले के अमसेना चौक के पास कथित रूप से संचालित एक अवैध कोयला डिपो को लेकर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि यहां मध्य प्रदेश की खदानों से आने वाले कोयले के परिवहन में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की जा रही हैं। आरोप है कि यह पूरा नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से संचालित हो रहा है और इसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
जीपीएस निकालकर बदल दिया जाता है पूरा खेल?
सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश से कोयला लेकर आने वाली ट्रकों को यादव ढाबा के पास रोककर उनका जीपीएस डिवाइस निकाल लिया जाता है। इसके बाद गौसिया ढाबा के सामने भारत पेट्रोल पंप के पास कथित रूप से डिपो संचालक से जुड़े लोग वाहन को अपने कब्जे में लेकर अमसेना चौक के समीप स्थित डिपो तक पहुंचाते हैं।
आरोप है कि डिपो में पहुंचने के बाद लगभग 45 टन कोयले में से करीब 30 टन कोयला उतार लिया जाता है और शेष माल के साथ वाहन को वापस उसी स्थान पर ले जाकर जीपीएस दोबारा लगा दिया जाता है, जिससे पूरी गतिविधि सामान्य परिवहन जैसी दिखाई दे।
वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा
सूत्रों का दावा है कि दो दिन पहले छत्तीसगढ़ पंजीकृत एक ट्रक (क्रमांक 6637) को रोककर पूछताछ की गई थी। बताया जा रहा है कि चालक के बयान का वीडियो और कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। दावा किया जा रहा है कि बातचीत के दौरान वाहन मालिक ने चालक से कहा कि यदि वाहन को किसी थाने ले जाया जा रहा है तो थाने का नाम बता देना, “मेरे पापा सब देख लेंगे।”
हालांकि, इस कथित रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दीपक पटेल पर संचालन के आरोप, संरक्षण को लेकर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरा संचालन दीपक पटेल नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है। यह भी दावा किया जा रहा है कि रिपोर्ट किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर है, जबकि संचालन कथित रूप से दीपक पटेल द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिस प्लांट से इस नेटवर्क का संबंध बताया जा रहा है, उसके मालिक के संबंध में भी कई तरह की चर्चाएं हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सवालों के घेरे में पूरा नेटवर्क
सवाल यह उठ रहा है कि यदि आरोप सही हैं तो मध्य प्रदेश की खदान से लेकर बिलासपुर स्थित डिपो और अंतिम गंतव्य तक कोयले का परिवहन बिना किसी संरक्षण के कैसे संभव हो सकता है? क्या इस पूरे मामले में किसी प्रभावशाली व्यक्ति, सफेदपोश, खाकी या अन्य लोगों का संरक्षण प्राप्त है? यह जांच का विषय है।
धमकी देने के भी आरोप
आरोप यह भी है कि मामले के उजागर होने के बाद डिपो संचालक की ओर से शिकायतकर्ताओं और संबंधित लोगों को धमकियां दी जा रही हैं। यदि ऐसा है तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है तथा इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
3 अगस्त को रायपुर में होगा ज्ञापन
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने घोषणा की है कि 3 अगस्त को रायपुर में संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। उनका कहना है कि ज्ञापन में मध्य प्रदेश की खदानों से लेकर बिलासपुर स्थित डिपो और कोयला प्राप्त करने वाली कंपनियों तक कथित मिलीभगत से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों को प्रस्तुत किया जाएगा तथा उच्च स्तरीय जांच की मांग की जाएगी।
प्रभाकर द्विवेदी की रिपोर्ट
93403 62455


