pub-1657030687483830

भिम्माडोगरी में हुई वेस्ट ऑफ शहडोल कोल माइन की लोक सुनवाई, “शून्य विस्थापन, 20 गुना वृक्षारोपण” का दावा

Posted on

July 31, 2026

by india Khabar 24

भिम्माडोगरी में हुई वेस्ट ऑफ शहडोल कोल माइन की लोक सुनवाई, “शून्य विस्थापन, 20 गुना वृक्षारोपण” का दावा

उमरिया /पाली। मेर्सस जे के सीमेंट लिमिटेड को आवंटित “वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) कोल माइन” की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए 31 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत भिम्माडोगरी में लोक जन सुनवाई संपन्न हुई। सुनवाई की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला कलेक्टर उमरिया पी .के. सेन गुप्ता ने की।

सुनवाई की शुरुआत में जे के सीमेंट लिमिटेड के महाप्रबंधक अनुज राज गौतम ने परियोजना की रूपरेखा रखते हुए कहा कि हम जानते हैं उद्योग आने पर स्थानीय लोगों की शंकाएं स्वाभाविक हैं। यह पूरी तरह भूमिगत खदान है, इसलिए यहां एक भी परिवार का विस्थापन नहीं होगा और जंगली जानवरों पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। परियोजना के लिए सिर्फ 3500 वृक्ष काटे जाएंगे, लेकिन इसके बदले 20 गुना से अधिक वृक्षारोपण स्थानीय स्तर पर किया जाएगा। सड़क किनारे भी छायादार और फलदार वृक्ष लगाए जाएंगे।

उन्होंने स्वास्थ्य, रोजगार और CSR को लेकर भी बड़े आश्वासन दिए। कहा कि जे के सीमेंट 100 साल से स्वास्थ्य सेवाएं दे रही है। यहां चलित स्वास्थ्य सुविधा और एम्बुलेंस भी उपलब्ध कराई जाएगी। खनन अत्याधुनिक मशीनों से होगा इसलिए जल स्तर में गिरावट नहीं आएगी। खदान से निकलने वाले पानी को शुद्ध कर पेयजल और सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जाएगा। भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को दिया जाएगा। अनपढ़ लोगों को भी उनकी क्षमता के अनुसार काम दिया जाएगा और दक्षता प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल बनाया जाएगा। CSR के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा और स्किल डवलपमेंट पर काम होगा। प्रशासन की अनुमति से स्थानीय स्कूलों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जाएगा। स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा और गांवों में सौर ऊर्जा भी लगाई जाएगी।

कंपनी प्रवक्ता उत्तम शर्मा ने कहा कि खनन पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा। पर्यावरण सलाहकार मृणाल जी ने बताया कि वायु प्रदूषण रोकने जल छिड़काव, 90 हेक्टेयर हरित पट्टी और 51,813 पौधे लगाए जाएंगे।

1481.19 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित इस खदान से अमिलिहा, भिम्माडोगरी, महरोई, बंधवा वारा, कन्नाबहरा, देवगवा, चंदनिया, बंधवा खुर्द एवं बरगवा के 9 गांव प्रभावित होंगे। इसमें 965 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। 153 मिलियन टन कोयला भंडार वाली इस परियोजना की उत्पादन क्षमता 0.70 मिलियन टन प्रति वर्ष है। 600 करोड़ की लागत से बनने वाली इस खदान से 34 वर्षों तक खनन होगा और 641 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। भारत सरकार ने इसे 1 अगस्त 2024 को सैद्धांतिक स्वीकृति दी है।

सुनवाई में जनप्रतिनिधियों ने परियोजना का समर्थन करते हुए कई शर्तें रखीं। जनपद अध्यक्ष मनीष सिंह ने कहा कि भूमिगत खनन से भूमि धंसाव का खतरा है, इसलिए प्रभावितों का पुनर्वास किया जाए। जल स्तर गिरने पर हर गांव में RO का पेयजल पाइप लाइन से दिया जाए। जितने पेड़ कटें उसका 10 गुना लगाए जाएं। रोजगार ठेकेदारी पर न देकर सीधे कंपनी दे और CSR का 30% महिला स्व-सहायता समूहों के लिए रखा जाए।

उपाध्यक्ष अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि उद्योग से अर्थव्यवस्था सुधरेगी, लेकिन जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण न हो। यह कृषि प्रधान क्षेत्र है, इसलिए खदान का पानी सिंचाई में उपयोग हो।

जिला पंचायत सदस्य हेमनाथ बैगा ने कहा कि यह विशेष जनजातीय क्षेत्र है। बैगा समाज वनोपज पर निर्भर है, इसलिए जीविकोपार्जन वाले वृक्ष लगाए जाएं। सड़क, भवन और ट्यूबवेल की सुविधा मिले, लेकिन जल स्तर न गिरे। गोफ क्षेत्र में भूमि धंसाव न हो और बैगा परिवारों के लिए अलग योजना बने।

अभिषेक अग्रवाल ने मांग की कि अधिग्रहित भूमि का मुआवजा “खनन भूमि” की दर से तय किया जाए ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिले।

सामाजिक कार्यकर्ता आर.डी. यादव ने कहा कि यह क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यान कॉरिडोर के अंतर्गत आता है। वन्यजीवों को नुकसान न हो इसके लिए परियोजना में विशेष योजना बनाई जाए और पर्यावरण को स्थिर रखा जाए।

सुनवाई के अंत में ADM श्री पी.के. सेन गुप्ता ने कहा कि यहां उठाए गए सभी सुझावों और आपत्तियों का संकलन कर उसे पर्यावरण मंत्रालय और संबंधित समिति को भेजा जाएगा।

अब देखना होगा कि कंपनी के “शून्य विस्थापन और 20 गुना वृक्षारोपण” के दावों और जनता की “मुआवजा, जल, जंगल” की मांगों के बीच पर्यावरण मंत्रालय क्या निर्णय लेता है।

अखिलेश द्विवेदी की रिपोर्ट
7879114228

Posted on

July 31, 2026

by india Khabar 24

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[democracy id="1"]
Scroll to Top