नरसिंहपुर, 7 जुलाई 2026
कृषि विभाग की ‘आत्मा परियोजना’ के अंतर्गत कार्यरत मैदानी और संविदा कर्मचारियों ने शासकीय ‘सार्थक ऐप’ के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति (ई-अटेंडेंस) दर्ज कराने की अनिवार्यता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कृषि तकनीकी संविदा कर्मचारी संघ (संबद्ध: भारतीय मजदूर संघ) की नरसिंहपुर जिला इकाई ने इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा है। कर्मचारियों ने व्यावहारिक और भौगोलिक दिक्कतों का हवाला देते हुए इस व्यवस्था से मुक्ति देने की मांग की है।
सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
कर्मचारी संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि विभाग में महिला कर्मचारियों की संख्या काफी अधिक है। ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में फील्ड ड्यूटी के दौरान उनके लिए शासकीय आवास या कोई अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। अधिकांश विकासखंडों में स्टाफ की भारी कमी है, जिसके चलते एक-एक कर्मचारी के जिम्मे 100 से 200 गांवों का विशाल क्षेत्र आता है। इसके साथ ही उन्हें सोयाबीन भावांतर, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान-गेहूं खरीदी और खाद वितरण जैसे अन्य कई महत्वपूर्ण विभागीय सर्वे और कार्यों को भी संभालना पड़ता है।
फील्ड वर्क में समय की अनिश्चितता
कर्मचारियों का कहना है कि फील्ड स्तर पर काम पूरी तरह से किसानों की उपलब्धता और उनकी सहूलियत पर निर्भर करता है। किसानों से संपर्क करने के चक्कर में कर्मचारियों के काम के घंटे तय नहीं रह पाते और कई बार उन्हें गांवों में ही रात्रि विश्राम करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में ऐप पर निर्धारित समय पर लॉग-इन या लॉग-आउट करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
सर्दियों का समय और परिवहन की समस्या
ज्ञापन में विशेष रूप से निम्नलिखित व्यावहारिक समस्याओं को रेखांकित किया गया है:
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- सर्दियों में समय की दिक्कत: सर्दियों के दिनों में शाम 5:30 बजे तक सूर्यास्त हो जाता है। सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक फील्ड में रहने के बाद दूरदराज के इलाकों से ऐप पर समय पर चेक-इन और चेक-आउट करने में भारी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं आती हैं।
- यातायात की असुविधा: फील्ड में तैनात कई महिला कर्मचारी खुद का वाहन चलाने में सक्षम नहीं हैं और वे सार्वजनिक बसों या साधनों पर निर्भर हैं। दूर-दराज के गांवों में समय पर बसें न मिलने के कारण ऐप पर समय पर उपस्थिति दर्ज करना उनके लिए असंभव हो जाता है।
- बैठने की व्यवस्था न होना: मुख्यालय के अलावा मैदानी इलाकों में कर्मचारियों के बैठने की कोई शासकीय व्यवस्था नहीं है, जिससे महिला कर्मचारियों को भौतिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कर्मचारियों की मांग:
कृषि तकनीकी संविदा कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष विवेक डहेरिया ने बताया कि इन वास्तविक और व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री महोदय से विनम्र आग्रह किया गया है कि ‘आत्मा परियोजना’ के समस्त कर्मचारियों को सार्थक ऐप पर उपस्थिति दर्ज करने की इस अनिवार्य बाध्यता से तत्काल मुक्त रखा जाए।
कृषि तकनीकी संविदा कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष विवेक डहेरिया ने बताया कि इन वास्तविक और व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री महोदय से विनम्र आग्रह किया गया है कि ‘आत्मा परियोजना’ के समस्त कर्मचारियों को सार्थक ऐप पर उपस्थिति दर्ज करने की इस अनिवार्य बाध्यता से तत्काल मुक्त रखा जाए।
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