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सावधान! गूगल पर अस्पताल का नंबर ढूंढना पड़ा भारी, शिक्षक के खाते से उड़े ₹4.72 लाख; एक APK फाइल ने किया खेल

Posted on

October 28, 2026

by india Khabar 24

शहडोल (गोहपारू)—-‘इंटरनेट पर किसी अस्पताल का संपर्क नंबर खोजना एक शासकीय शिक्षक के लिए जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई गंवाने का सबब बन गया। नागपुर के एक निजी अस्पताल में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लेने के चक्कर में शिक्षक साइबर ठगों के ऐसे जाल में फंसे कि महज कुछ ही मिनटों में उनके बैंक खाते से 4 लाख 72 हजार 600 रुपये साफ हो गए। ठगी का यह नया और चौंकाने वाला तरीका व्हाट्सएप पर भेजी गई एक संदिग्ध APK (Android Package) फाइल के जरिए अंजाम दिया गया।

बीमारी का इलाज कराने की थी तैयारी

जानकारी के अनुसार, पीड़ित रामनिवास जसवाल गोहपारू थाना क्षेत्र के एक शासकीय विद्यालय में शिक्षक हैं। पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी और चक्कर आने की शिकायत के कारण वे नागपुर के एक नामी निजी अस्पताल में अपना इलाज कराने की योजना बना रहे थे। डॉक्टर से मिलने का समय (अपॉइंटमेंट) तय करने के लिए उन्होंने गूगल पर अस्पताल का कस्टमर केयर नंबर सर्च किया।

ऐसे बुना गया ठगी का जाल

गूगल सर्च से मिले नंबर पर जब शिक्षक ने कॉल किया, तो दूसरी तरफ मौजूद साइबर ठग ने बेहद पेशेवर तरीके से बात की। उसने अपॉइंटमेंट पक्का करने के नाम पर शिक्षक को झांसे में लिया और प्रक्रिया पूरी करने के बहाने व्हाट्सएप पर एक फाइल (APK File) भेजी। शिक्षक ने इसे अस्पताल की ही कोई आधिकारिक फाइल या फॉर्म समझकर अपने मोबाइल में डाउनलोड कर लिया।

मोबाइल का रिमोट एक्सेस लेते ही 21 बार में खाली किया खाता

जैसे ही शिक्षक ने उस फाइल को इंस्टॉल किया, उनका मोबाइल फोन पूरी तरह से साइबर ठगों के नियंत्रण (रिमोट एक्सेस) में चला गया। ठगों ने मोबाइल के जरिए उनके नेट बैंकिंग और बैंक विवरणों तक पहुंच बना ली। इसके बाद स्क्रीन मिररिंग या ओटीपी फॉरवर्डिंग के जरिए देखते ही देखते 21 अलग-अलग ट्रांजैक्शन कर खाते से 4,72,600 रुपये उड़ा दिए।

जब लगातार पैसे कटने के मैसेज आए, तो शिक्षक के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत अपने बेटे को इसकी जानकारी दी। बेटे ने तत्परता दिखाते हुए सबसे पहले बैंक से संपर्क कर खाते को फ्रीज करवाया और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद गोहपारू थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई।

 

पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू

गोहपारू थाना प्रभारी जयप्रकाश शर्मा ने बताया कि शिक्षक की शिकायत पर अज्ञात जालसाजों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस साइबर सेल की मदद से ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों के ट्रांजैक्शन विवरण और संदिग्ध APK फाइल के सोर्स की बारीकी से जांच कर रही है।

⚠️ साइबर पुलिस की आम जनता से अपील: इन बातों का रखें खास ध्यान

इस घटना के बाद पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने नागरिकों के लिए एडवायजरी जारी की है:

• गूगल सर्च पर अंधविश्वास न करें: किसी भी अस्पताल, बैंक, कूरियर कंपनी या संस्थान का नंबर गूगल के सर्च रिजल्ट से सीधे न उठाएं। हमेशा उनकी आधिकारिक वेबसाइट (Official Website) पर जाकर ही नंबर वेरिफाई करें।

• APK फाइल डाउनलोड करना यानी मुसीबत को दावत: व्हाट्सएप, टेलीग्राम या किसी अनजान लिंक से भेजी गई .apk एक्सटेंशन वाली फाइल कभी भी डाउनलोड न करें। यह एक तरह का वायरस (मालवेयर) होता है जो आपके फोन का पूरा कंट्रोल हैकर्स को दे देता है।

• गोपनीयता बनाए रखें: कोई भी प्रतिष्ठित संस्थान फोन पर आपसे ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन (UPI PIN) या बैंक पासवर्ड नहीं मांगता।

• ठगी होने पर तुरंत क्या करें?: यदि आप किसी भी तरह की साइबर धोखाधड़ी के शिकार होते हैं, तो बिना समय गंवाए तुरंत गोल्डन ऑवर (शुरुआती 1-2 घंटे) के भीतर केंद्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं ताकि पैसे को होल्ड किया जा सके।

शहडोल से सत्येन्द्र सोनी

Posted on

October 28, 2026

by india Khabar 24

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