बरगी क्रूज हादसा: कोर्ट की सख्ती, चालक और क्रू पर FIR के आदेश
जबलपुर। बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे को लेकर न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) की अदालत ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए क्रूज चालक और अन्य क्रू सदस्यों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घटना में प्रथम दृष्टया गंभीर
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि क्रूज चालक, जो पानी की स्थिति और जोखिम से भली-भांति परिचित था, उसने यात्रियों को डूबता हुआ छोड़ दिया और स्वयं सुरक्षित निकल गया। कोर्ट ने इसे न केवल लापरवाही बल्कि आपराधिक कृत्य मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 106 और 110 के तहत मामला दर्ज करने योग्य बताया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है।
कोर्ट ने बरगी थाना प्रभारी को निर्देशित किया है कि दो कार्यदिवस के भीतर FIR दर्ज कर जांच प्रारंभ की जाए और इसकी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। उल्लेखनीय है कि 30 अप्रैल 2026 को हुए इस हादसे में 13 लोगों की डूबने से मौत हो गई थी। वहीं, कोर्ट ने उन लोगों की सराहना भी की है, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर बचाव कार्य में अहम भूमिका निभाई।
अधिवक्ता विवेक तिवारी ने बताया कि माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जबलपुर, श्री डी.पी. सूत्रकार की अदालत ने बरगी क्रूज हादसे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए थाना प्रभारी बरगी को धारा 106 और 110 BNS के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर मामले को अत्यंत गंभीर माना है, जिसमें यह सामने आया कि हादसे के बाद चालक और स्टाफ यात्रियों को छोड़कर फरार हो गए, जो आपराधिक मानव वध की ओर संकेत करता है। न्यायालय ने अपने आदेश में लापरवाही को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हुए विस्तृत जांच और जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता बताई है, साथ ही बचाव कार्य में लगे लोगों की सराहना भी की है। अधिवक्ता तिवारी के अनुसार, इस मामले में न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान लेना और जांच की निगरानी शुरू करना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे अब निष्पक्ष जांच संभव हो सकेगी और अब तक हो रही लीपापोती पर रोक लगेगी।




