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जिले में जगह जगह चल रहे जुए के फड़, नवयुवक पीढ़ी भी इस खेल में हैं लिप्त

Posted on

November 21, 2023

by india Khabar 24

सभ्य समाज के लिए कलंक जुआ और सट्टा

पूजा ज्योतिषी मण्डला

मंडला पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पुलिस महकमे द्वारा सारे अवैध धंधों पर नकेल कसने का काम लगातार किया जा रहा है। कुछ समय पहले नैनपुर में जुएँ पर कार्यवाही हुई थी जहां 80 से ज्यादा जुआडी 52 पत्तियों की महफ़िल सजा कर लाखों रुपये उड़ा रहे थे। जिस पर मण्डला पुलिस की अब तक कि सबसे बड़ी कार्यवाही हुई थी। लेकिन चुनावी समय में यह खेल फिर शुरू हो गया है जिस पर पुलिस द्वारा कई जगह फड़ पकड़े भी गए लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अभी भी जुआरियो के हौंसले बुलंद है इन जुआरियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ है। दीपावली के पहले से ही शहर सहित मण्डला जिले में अभी भी कई जगह धड़ल्ले से जुए के फड़ लगाए जा रहे हैं लोभ लालच और आसानी से पैसे कमाने के चक्कर मे लोग अपना पैसा बर्वाद करने इन जुआरियो के पास जाकर रोजाना लाखों रुपये का जुआ खेल रहे है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जुआरी पुलिस को चकमा देकर स्थान बदल-बदल कर रोज महफ़िल सजाते हैं।

इन क्षेत्रों में जमकर चल रहा है 52 पत्तों का खेल –

जिला मुख्यालय में पुरवा, रमपुरा, छोटी खैरी में पीपल घाट, महाराजपुर में संगम घाट, आमानाला, महाराजपुर, पौड़ी, जंतीपुर, हिरदेनगर, पीपरपानी, मोहगांव, लिमरुआ, बम्हनी, निवास, नारायणगंज, बीजांडांडी, अंजनिया, बिछिया, घुटास, नैनपुर सहित अन्य जगह अभी भी जुआ का फड़ संचालित हो रहा हैं लेकिन पुलिस का इस ओर ध्यान नही है। मंडला यूं तो कहने को बहुत शांत क्षेत्र है परंतु कुछ तत्व इसे भ्रष्ट समाज की ओर ढकेलना चाहते हैं। त्यौहारों के बीच 52 पत्तों का खेल मड़ई मेला सहित मंडला शहर और आसपास लगे क्षेत्रों में जमकर चल रहा है। जुआ के खेल में विवाद की स्थिति भी बन रही है, जिससे भी अप्रिय घटना होने की सम्भावना बनी रहती है।

सभ्य समाज के लिए कलंक जुआ और सट्टा

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र जिला मंडला के ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों में जुआ और सट्टे का व्यवसाय एक बीमारी की तरह फैला हुआ हैं। जुआ और सट्टा का खेल क्षेत्र के युवकों को बड़े अपराधों की ओर ले जा रहा हैं, वही अपने रोजी रोजगार छोड़कर जुआ, सट्टे की लालच में ग्रामीण व शहरी युवक बर्बाद हो रहे हैैं। इस बुरी लत में फंसे युवा वर्ग साहूकार के कर्ज में डूब कर चोरी लूट जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। समय रहते पुलिस विभाग ने इन जुआरियों व सटोरियों पर नकेल नहीं कसी तो आने वाले समय पर बड़ी घटनाओं का जन्म लेना कोई बड़ी बात नहीं होगी। जिले में जुआ और सट्टा का इतना जोर हैं की कस्बाई क्षेत्रों में युवा वर्ग, श्रमिक कर्मचारी, महिलाएं, स्कूली छात्र, राजनीतिक पार्टी और छोटे बड़े समाज के प्रतिष्ठित कहलाने वाले अनेक लोग इस धंधे के चक्कर में फंस चुके हैं, जिसके चलते उन्हें स्वयं की बर्बादी का कोई ज्ञान नहीं हैं। धन की लालच के कारण लोग ऐसे सपनों के दुनिया में खोए रहते हैं कि उन्हें सिर्फ सौ का हजार बनाने के अलावा और कुछ नहीं सूझता। सुबह सूर्य की पहली किरण से यह सिलसिला जो शुरू होता हैं तो आधी रात को ही यह थमता हैं। इस खेल में किसी को खुशी तो किसी को गम के दौर से गुजारना पड़ता हैं लेकिन लाख नुकसान और जिल्लत उठाने के बाद भी इनकी दिनचर्या में कोई अंतर नहीं आता हैं।

जगह जगह मौजूद हैं सट्टा पट्टी लिखने वाले एजेंट-

शहर और कस्बाई क्षेत्रों के चौराहे के पान दुकान, किराने की दुकान, कपड़ों की दुकान, साइकिल की दुकान, होटले, सब्जी मंडी व शासकीय परिसरों में भी सट्टा-पट्टी लिखने वाले एजेंट अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं और सट्टा खेलने वाले उनके पास अपने-अपने तरीके से पहुंच कर अपने भाग्यशाली अंकों की लम्बी फेहरिस्त रुपयों सहित दे जाते हैं। जुआ सट्टा खिलाने वालों को अब पुलिस का कोई खौफ नहीं हैं। यहां तक पूरे मंडला शहर से लेकर गांव तक जुआ और सट्टा का खेल बृहद रूप से पनप गया हैं। बता दें कि शहर के बहुत से चौराहों पर बकायदा काउंटर लगाकर सट्टे की पट्टी लिखते देखा जा सकता हैं। कई जगह मोबाइल से ग्रामीण क्षेत्रों में इनके एजेंटों द्वारा सट्टे की पट्टी दी जाती हैं। ये एजेंट नागपुर मुंबई से संचालित सट्टे का परिणाम जानने तथा ओपन क्लोज काटने के लिए बैठे रहते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक युग का फायदा उठा रहें सट्टा व्यवसाई और खिलाड़ी-

बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक युग के चलते मोबाइल से ओपन क्लोज और जोड़ी का लेनदेन कर रहे हैं। जिले में प्रतिदिन लगभग दसों लाखों रुपए का सट्टा होता हैं और सिर्फ पाट्टीदार जो पट्टी लिख रहे हैं वे दिन में हजारों रुपए का कमीशन खा रहें हैं। जिला पुलिस अनेक बार विशेष अभियान चलाकर हड़कम्प जरूर मचा देता हैं और जिले भर में सैकड़ों की संख्या में सटोरी और जुआरी पकड़े जाते हैं किंतु न्यायालय से जमानत और जुर्माना कराकर वे फिर इस कार्य में दोगुना लगन से लग जाते हैं। मंडला शहर के साथ ही जिले के सभी क्षेत्रों में और सर्वाधिक ग्रामीण क्षेत्रों में भारी जोर हैं। अब सटोरियों और पट्टीदार भी कोई छुटपुट आदमी नहीं हैं, जिस पर पुलिस विभाग का कोई छोटा कर्मचारी सीधे हाथ डाल सकें। इस पर प्रतिबंध लगाना विशेष टीम को ही आगे आना होगा तभी समाज में पनप रहे इस बुराई का अंत सम्भव हो सकेगा।

शहर में वर्षों से संचालित हो रहा है जुआ व सट्टा का खेल-

मंडला शहर में वर्षों से जुआ व सट्टा का खेल संचालित हो रहा है, यह खेल पुलिस के लिए एवं जुआ सट्टा खेलने वालों के परिवार का सिरदर्द बना हुआ हैं। बता दें की पुलिस के लिए नए-नए सटोरी और जुआरी हमेशा चुनौती बनकर सामने आ जाते हैं पहले इस खेल में वे लोग शामिल थे जिनकी न तो समाज में कोई इज्जत रहती थी ना ही कोई व्यवसाय लेकिन बदलते समय के साथ-साथ अब इस खेल के संचालन में तथाकथित प्रतिष्ठित कहे जाने वाले लोग भी शामिल हो चुके हैं। जिनके काम करने वालों का लम्बा नेटवर्क भी रहता हैं, जिससे जिले में सट्टे व जुआ का कार्य लगातार बढ़ता ही जा रहा हैं। 52 पत्तों व सट्टा के अंको के इस खेल में लोग सुबह से देर रात तक विषाद बिठाए आने वाले अंक का गणित भिड़ाते रहते हैं।

चर्चा का विषय जुआरियों के द्वारा महीना बंदी रुपयों का नजराना किया जाता है भेंट –

मंडला नगर में चर्चा का विषय हैं कि जुआरियों के द्वारा स्थानीय पुलिस को महीना बंदी रुपयों का नजराना भेंट दिया जाता हैं, जिसके चलते पुलिस इनके व्यवसाय को रोकने में नाकाम रहती हैं। इस धंधे में युवा तो युवा बुजुर्ग एवं महिलाएं भी इसमें लिप्त हैं। यह अपने दिन भर की कमाई को सट्टे के नम्बरों में बर्बाद करते हैं। आज मंडला क्षेत्र के आसपास के गांव में सट्टा-पट्टी और जुआ का खेल इनकी आदत बन चुकी हैं। ऐसा नहीं हैं कि पुलिस प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है। जानकारी के बाद भी पुलिस कोई सुध लेना ही नहीं चाहती हैं। आज मंडला के अलावा आसपास के क्षेत्रों में लोग सबसे ज्यादा 52 पत्तों के खेल और सट्टा-पट्टी में लिप्त हैं। समाज में फैली इस दूषित प्रणाली पर रोक आवश्यक हैं। मीडिया जब इस सामाजिक बुराई को समाचार प्रकाशन कर पुलिस प्रशासन को सच का आइना दिखाती हैं तो कुछ दिन तक पुलिस इस गलत व्यवसाय को बंद करा देती हैं। लेकिन जैसे मामला ठंडा होता हैं जुआ और सट्टा पुनः संचालित होने लगता हैं। अब देखना यह है कि मंडला शहर में जुआडियों का आतंक कब कम होगा ताकि पुलिस की सक्रियता को शहर की जनता भी जान सके। हालांकि पुलिस ने छोटे-छोटे जुआरियों को पकड़ कर कार्यवाही की है, लेकिन बड़े जुआरियों को पकड़ने में अभी भी सफलता हाथ नहीं लग सकी है।

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