“प्रमोशन या पदावनति.? एक आदेश ने 10 साल की वरिष्ठता पर फेर दिया पानी”
शक्ति भवन के आदेश से पावर जनरेटिंग कंपनी में मचा बवाल, किसी को मिला प्रमोशन तो किसी का घट गया पद का रुतबा।
बिरसिंहपुर पाली।
मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में 10 जुलाई को शक्ति भवन, जबलपुर से जारी पदोन्नति आदेश ने अधिकारियों के बीच नई बहस छेड़ दी है। वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने के बाद जहां कई अधिकारियों के चेहरे खिल उठे हैं, वहीं बड़ी संख्या में वरिष्ठ इंजीनियर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह आदेश पदोन्नति से ज्यादा “वरिष्ठता रीसेट करने वाला फैसला” साबित हुआ है।
विवाद की वजह वर्ष 2016 को आधार वर्ष बनाकर पदोन्नति देना है। आदेश के अनुसार अधिकारी जिस पद पर वर्ष 2016 में पदस्थ था, उसी आधार पर उसे एक स्तर की पदोन्नति प्रदान की गई। इससे पिछले 10 वर्षों में नियमित रूप से उच्च पदों पर पहुंच चुके कई अधिकारियों की वर्तमान स्थिति को मान्यता नहीं मिल सकी। उनका दावा है कि वर्षों की वरिष्ठता, अनुभव और पदस्थापना का लाभ एक झटके में समाप्त हो गया।
मुख्य अभियंताओं को सबसे बड़ा झटका
सबसे अधिक असर मुख्य अभियंता (CE) और अतिरिक्त मुख्य अभियंता (ACE) स्तर के अधिकारियों पर पड़ा है। जो अधिकारी वर्ष 2016 में कार्यपालन अभियंता (EE) थे और बाद में अधीक्षण अभियंता, अतिरिक्त मुख्य अभियंता और मुख्य अभियंता तक पहुंचे, उन्हें अब केवल अधीक्षण अभियंता (SE) के रूप में पदोन्नति का लाभ दिया गया है। इससे विभाग में असंतोष का माहौल है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद खुला रास्ता
पदोन्नति नियम-2025 पर लगी कानूनी अड़चन हटने के बाद राज्य सरकार ने लगभग 10 वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इस प्रक्रिया से प्रदेश के लाखों अधिकारी-कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन इंजीनियरिंग संवर्ग में इसका असर उल्टा दिखाई दे रहा है।
नई नीति, नए समीकरण
नई पदोन्नति व्यवस्था में इंजीनियरों को पहले मिलने वाला “योग्यता सह वरिष्ठता” का विशेष लाभ समाप्त कर दिया गया है। अब उन्हें भी अन्य संवर्गों की तरह सामान्य नियमों के तहत पदोन्नति मिलेगी। यही कारण है कि कार्यवाहक रूप से उच्च पदों पर कार्यरत कई अधिकारी अपेक्षित लाभ से वंचित रह गए।
किसी के लिए झटका, किसी के लिए सुनहरा मौका
जहां वरिष्ठ अधिकारियों में नाराजगी है, वहीं वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे कई सहायक अभियंताओं (AE) के लिए कार्यपालन अभियंता (EE) बनने का रास्ता खुल गया है। उनके बीच खुशी का माहौल है और इसे लंबे इंतजार के बाद मिला अवसर माना जा रहा है।
चर्चा का विषय बना आदेश
फिलहाल शक्ति भवन का यह आदेश पूरे पावर जनरेटिंग कंपनी में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक ही आदेश ने विभाग को दो हिस्सों में बांट दिया है—एक तरफ खुशी, दूसरी तरफ नाराजगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस आदेश में कोई संशोधन होगा या फिर यही व्यवस्था आगे लागू रहेगी।
अखिलेश द्विवेदी की रिपोर्ट
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