
नरसिंगपुर मध्यप्रदेश
नरसिंहपुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में शुक्रवार को विधायक जालम सिंह पटैल एवं कलेक्टर रोहित सिंह की मौजूदगी में किया गया। कार्यशाला में गुजरात के भावनगर से आये मास्टर ट्रेनर नरसिंह भाई मोरी ने जिले के किसानों को प्राकृतिक खेती के संबंध में विस्तार से प्रशिक्षण दिया और इसके फायदे बताये। इस दौरान जिले में प्राकृतिक खेती करने की रणनीति भी तैयार की गई। कार्यशाला में विधायक जालम सिंह पटैल ने जिले में प्राकृतिक खेती करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिले के किसान बहुत अच्छे से खेती करके पैदावार भी अच्छी ले रहे हैं, लेकिन खेती में रासायनिक खाद एवं कीटनाशक बहुत अधिक मात्रा में डाले जाने से कृषि उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक नहीं रहते, यह विचारणीय है। जिले में करीब एक लाख हेक्टर में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल ली जा रही है, जिसमें किसान रासायनिक कीटनाशक के 5- 6 स्प्रे कर रहे हैं, इससे उत्पाद में विषाक्तता बढ़ती है। इस कारण से विभिन्न बीमारियां भी सामने आती हैं। उन्होंने गुजरात से आये मास्टर ट्रेनर नरसिंह भाई द्वारा दिये गये प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण को पूरी तन्मयता से प्राप्त कर उस पर अमल करने का आव्हान जिले के किसानों से किया।कलेक्टर रोहित सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जिले के प्रगतिशील कृषक कृष्णपाल लोधी द्वारा की जा रही प्राकृतिक खेती का उदाहरण देते हुए इसे अपनाने का आग्रह जिले के किसानों से किया। उन्होंने बताया कि आगामी खरीफ मौसम में जिले में करीब 10 हजार एकड़ में प्राकृतिक खेती की शुरूआत करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने खरीफ सीजन में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। श्री सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती के अध्ययन के लिए शीघ्र ही जिले के किसानों के बड़े दल को हरियाणा भ्रमण पर भेजा जायेगा। जिले के किसानों को वहां गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के फील्ड का भ्रमण कराया जायेगा, ताकि जिले में व्यापक पैमाने पर प्राकृतिक खेती को अपनाया जा सके। उन्होंने भगवान नरसिंह की जयंती पर आयोजित तीन दिवसीय नगर गौरव दिवस के कार्यक्रमों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने के लिए किसानों की प्रशंसा की। उन्होंने नरसिंह तालाब के जीर्णोंद्धार एवं सौंदर्यीकरण में सहयोग देने का आग्रह भी किसानों से किया। प्रशिक्षण में गुजरात के मास्टर ट्रेनर नरसिंह भाई मोरी ने किसानों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, अग्निास्त्र तथा ब्रम्हास्त्र आदि बनाने की विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देशी गाय के एक ग्राम गोबर में जीवाणुओं की संख्या करीब 300 करोड़ होती है। जब हम जीवामृत बनाते हैं, तो 200 लीटर के ड्रम में पानी भरकर उसमें 10 किलो देशी गाय का गोबर, 10 लीटर गौमूत्र तथा दो किलो गुड़ मिलाते हैं। इसमें बरगद के पेड़ के नीचे की एक मुट्ठी मिट्टी डालकर घड़ी की दिशा में चलाते हैं, इससे 5- 6 दिन के भीतर असंख्य जीव तैयार हो जाते हैं। ये सभी हमारी फसलों के लिए मित्र जीव होते हैं। इसे भूमि में प्रयोग करने से जीवित जीवों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है। साथ ही फसल उत्पादन एवं उत्पादकता में लगातार वृद्धि होती है। उन्होंने घनजीवामृत के बनाने की तकनीक एवं प्रयोग भी किसानों को बताये। आत्मा परियोजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की पत्तियों को एकत्रित कर इनसे विभिन्न प्रकार के कीटनाशक बनाने की तकनीक किसानों को प्रशिक्षण में बताई गई। पत्तियों से नीमास्त्र, अग्निास्त्र, ब्रम्हास्त्र तथा दशपर्णी अर्क बनाने की विधियां किसानों को बताई गई। प्रशिक्षण में करीब 150 गांवों के बड़ी संख्या में किसान और कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग का अमला मौजूद था।


