चार माह से बंद पड़ी नल-जल योजना प्यासे ग्रामीण,
कलेक्टर से लगाई गुहार
अखिलेश द्विवेदी की रिपोर्ट
शहडोल। एक तरफ सरकार हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ग्राम पंचायत पटासी में नल-जल योजना की हालत सरकारी दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में स्वीकृत नल-जल योजना का कार्य पिछले करीब चार माह से पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है, जिससे भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराता जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार योजना के तहत बोरवेल खनन का कार्य भी अधूरा छोड़ दिया गया है और एक महत्वपूर्ण प्वाइंट का खनन अभी तक पूरा नहीं किया गया। सवाल यह उठ रहा है कि जब योजना स्वीकृत हो चुकी है तो फिर कार्य को बीच में रोकने के पीछे आखिर कौन जिम्मेदार है?
सूख रहे हैं हैंडपंप, बढ़ रहा जल संकट
ग्राम पंचायत पटासी में अधिकांश हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है। कई स्थानों पर पानी निकलना बंद हो गया है, जिससे ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और ठेकेदार मानो आंखें मूंदकर बैठे हैं
सरकारी योजनाओं पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते नल-जल योजना का कार्य पूरा कर दिया जाता तो आज गांव को पानी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन को ग्रामीणों की परेशानियां दिखाई नहीं दे रही हैं? क्या नल-जल योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी?
कलेक्टर से लगाई गुहार
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपकर मांग की है कि बंद पड़े कार्य को तत्काल शुरू कराया जाए तथा अधूरे बोरवेल खनन को पूर्ण कराकर योजना को जल्द से जल्द चालू कराया जाए, ताकि गांव के लोगों को पेयजल संकट से राहत मिल सके।
चार माह से बंद पड़ी योजना का जिम्मेदार कौन?
अधूरे कार्य पर विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की?
भीषण गर्मी में ग्रामीणों को पानी के लिए क्यों तरसना पड़ रहा है?
क्या प्रशासन अब जागेगा या
फिर ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा


