जबलपुर | मध्य प्रदेश के जबलपुर में कानून और न्याय की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। माननीय उच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों के पालन में, जबलपुर के अधारताल क्षेत्र में एक शव को कब्र से निकालकर पुनः परीक्षण (Exhumation) के लिए भेजा गया। यह पूरी प्रक्रिया अधारताल तहसीलदार नीलू बागरी की प्रत्यक्ष निगरानी और प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुई।
क्या है पूरा मामला?
यह कार्रवाई नरसिंहपुर जिले में दर्ज एक पुराने और संदिग्ध मामले की जांच से जुड़ी है। मृतक गयासुद्दीन कुरैशी (बोरीपार, नरसिंहपुर निवासी) की मार्च 2025 में एक हादसे के बाद अस्पताल में मौत हो गई थी, जिसके बाद बिना पोस्टमार्टम के शव को दफना दिया गया था। मृतक के भाई कासिमुद्दीन कुरैशी ने डिस्चार्ज रिपोर्ट में मृतक के सीने पर चोट के निशानों का हवाला देते हुए मौत को संदिग्ध बताया और उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम के आदेश दिए थे।
प्रशासनिक सतर्कता और संवेदनशीलता
कार्रवाई के दौरान मृतक के भाई ने शव की पहचान को लेकर कुछ आपत्तियां व्यक्त की थीं। प्रशासन ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए परिवार द्वारा बुलाए गए गवाह की मौजूदगी में ही उत्खनन की प्रक्रिया पूरी की, ताकि भविष्य में पहचान या प्रक्रिया पर कोई सवाल न उठे।
तहसीलदार का बयान
मौके पर उपस्थित तहसीलदार नीलू बागरी ने मीडिया को बताया:
“माननीय उच्च न्यायालय के आदेश और एसडीएम अधारताल के निर्देशों के तहत यह कार्रवाई की गई है। नरसिंहपुर में दर्ज एक मामले की निष्पक्ष जांच के लिए शव का पुनः परीक्षण आवश्यक था, जिसे नियमानुसार संपन्न कराया गया है।”
जांच का अगला चरण
कब्र से निकाले गए शव को पंचनामा की कार्यवाही के बाद पोस्टमार्टम के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद ही नरसिंहपुर पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और मौत के असली कारणों की पुष्टि कर पाएगी।
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