pub-1657030687483830

नए नापतौल नियमों के खिलाफ मध्य प्रदेश के व्यापारियों में आक्रोश, संशोधन की मांग को लेकर भोपाल भेजा गया आपत्ति पत्र

Posted on

August 9, 2026

by india Khabar 24

शहडोल–मध्य प्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम 2011 में सरकार द्वारा प्रस्तावित नए संशोधनों को लेकर प्रदेश के छोटे व्यापारियों और नापतौल उपकरण सुधारकों (रेपेयरर्स) में भारी असंतोष है। 31 जुलाई 2026 को जारी किए गए नए प्रारूप के विरोध में शहडोल के भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के संचालक नंद किशोर बहरानी ने नापतौल निरीक्षक कार्यालय के माध्यम से प्रमुख सचिव (खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, भोपाल) को एक विस्तृत आपत्ति पत्र भेजा है।व्यापारियों का कहना है कि नए नियम छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों के हित में नहीं हैं और इससे उनका रोजगार पूरी तरह प्रभावित होगा।

व्यापारियों की मुख्य आपत्तियां और मांगें:

पता बदलने के नियम पर आपत्ति: नियम 9 (बिंदु 5) को हटाने की मांग की गई है। छोटे व्यापारी किराए की दुकानों पर काम करते हैं, जिन्हें अक्सर जगह बदलनी पड़ती है। नए नियमों से उन पर पता बदलने का भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।प्रतिभूति राशि (Security Deposit) का विरोध: व्यापारियों का कहना है कि अब सभी सत्यापन शुल्क ऑनलाइन जमा होते हैं, जिससे विभाग को कोई वित्तीय नुकसान नहीं होता। ऐसे में ₹5000 की प्रतिभूति राशि जमा कराने का कोई औचित्य नहीं है, इसे हटाया जाए।

सालाना रिटर्न की व्यवस्था हो: उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मासिक प्रतिवेदन (Monthly Return) की जगह वार्षिक प्रतिवेदन या छत्तीसगढ़ की तर्ज पर त्रैमासिक प्रतिवेदन की व्यवस्था लागू की जाए।

पंजीकरण शुल्क कम हो: अनुसूची-चार में मरम्मतकर्ता का पंजीकरण शुल्क ₹2500, संशोधन शुल्क ₹500 और द्वितीय प्रति का शुल्क ₹200 रखने का सुझाव दिया गया है।

सत्यापन फीस में बढ़ोतरी का विरोध: अनुसूची आठ (बिंदु 7) में बढ़ाई गई सत्यापन फीस को वापस पुराना जैसा करने की मांग की गई है। व्यापारियों का दावा है कि फीस बढ़ने से राजस्व बढ़ने के बजाय कम होगा, क्योंकि वर्तमान में भी केवल 50% लोग ही उपकरणों की मरम्मत और सत्यापन करवाते हैं।राज्य स्तर पर हो पंजीकरण: मरम्मतकर्ताओं का पंजीकरण राज्य, संभाग और जिला स्तर पर ही सुलभ किया जाए।

‘एक देश, एक विधान’ की तर्ज पर सरलीकरण की मांग—आपत्ति पत्र में केंद्र सरकार की ‘एक देश, एक विधान’ और व्यापार के सरलीकरण (Ease of Doing Business) की नीति का हवाला दिया गया है। व्यापारियों ने सरकार से अपील की है कि नियमों और शुल्कों को सरल बनाया जाए ताकि नई पीढ़ी भी इस स्वरोजगार की ओर आकर्षित हो सके। इस पत्र की प्रतियां भोपाल नियंत्रक, भारत सरकार के विधिक माप विज्ञान निदेशक और खाद्य मंत्री को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु ईमेल द्वारा भेजी गई हैं।

शहडोल  से सत्येन्द्र  सोनी

Posted on

August 9, 2026

by india Khabar 24

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[democracy id="1"]
Scroll to Top