इस प्रतियोगिता में जबलपुर डिवीजन के जवाहर नवोदय विद्यालयों के पूर्व छात्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली 9 टीमों ने हिस्सा लिया। लीग चरण के मैच 18 जनवरी को 8 ओवर के मुकाबलों के रूप में खेले गए, जबकि 19 जनवरी को 10 ओवर के नॉकआउट मैच हुए।
सैकड़ों पूर्व छात्र अपनी-अपनी टीमों का समर्थन करने के लिए आयोजन स्थल पर पहुंचे, और उससे भी अधिक लोगों ने प्रतियोगिता को ऑनलाइन देखा।राज्य और केंद्र सरकार में उच्च पदों पर कार्यरत पूर्व छात्रों ने भी इस आयोजन में शामिल होने के लिए समय निकाला। नवोदय परिवार के दिग्गज शिक्षक जैसे नायडू सर और पोल सर ने भी इस आयोजन में शिरकत की।
मंडला ने लीग चरण में जबलपुर और बालाघाट का सामना किया। मंडला ने अपने अभियान की शुरुआत जबलपुर पर 24 रनों की शानदार और निर्णायक जीत के साथ की। लेकिन जब मंडला ने बालाघाट से मुकाबला किया, तो क्रिकेट का जुनून अपने चरम पर पहुंच गया। यह मुकाबला आखिरी गेंद तक कांटे की टक्कर वाला रहा, जिसमें मंडला केवल 1 रन से हार गया और बालाघाट ने रोमांचक जीत दर्ज की।
अंक तालिका और नेट रन रेट (NRR) ने ऐसा समीकरण बनाया कि मंडला और बालाघाट का आमना-सामना सेमीफाइनल में भी हुआ। मंडला ने टॉस जीतकर बालाघाट को पहले बल्लेबाजी के लिए न्योता दिया। बालाघाट को अजीत पट्टा की जादुई गेंदबाजी (2 ओवर, 3 विकेट, 7 रन) के चलते 56/7 पर रोका गया। मंडला ने यह लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया।
इस जीत ने माइटी मंडला को सेमीफाइनल से फाइनल में पहुंचा दिया, जहां उसका मुकाबला सिवनी से हुआ। सिवनी ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 78 रन का लक्ष्य रखा। यह लक्ष्य पहले चुनौतीपूर्ण लग रहा था, लेकिन महेंद्र की शानदार पारी 53*(27) की बदौलत मंडला ने 9 विकेट से जीत दर्ज की और 17 गेंद शेष रहते ही लक्ष्य हासिल कर लिया। स्टेडियम में ढोल-नगाड़ों के साथ मंडला के पूर्व छात्र खुशी में झूम उठे।
यह आयोजन नवोदय पूर्व छात्र समुदाय में अपनत्व और एकता की भावना को प्रदर्शित करता है। यह नवोदय परिवार में व्याप्त समावेशिता का प्रतीक है, जो किसी भी प्रकार के विभाजन या भेदभाव को हतोत्साहित करता है और “राष्ट्रीय एकता” को बढ़ावा देता है। कैंपस के दिनों में बनी दोस्तियां आज भी उतनी ही प्रगाढ़ हैं। यह भी सिद्ध करता है कि “एक बार नवोदयन, हमेशा नवोदयन।”