
डिंडोरी मध्यप्रदेश
डिंडोरी :- पूरे विश्व में गणेश उत्सव का पर्व धूमधाम के साथ मनाया जाता है. कृष्ण जन्माष्टमी के बाद अब घरों और मंदिरों में गणेश उत्सव की धूम है. मूर्तिकार गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. पिछले दो सालों से मूर्तिकार नुकसान झेल रहे थे, क्योंकि सरकार द्वारा गणेश मूर्ति विसर्जन पर और बड़े कार्यक्रमों पर पूरी तरीके से रोक लगाई गई थी. इस साल कोविड-19 का असर भी न के बराबर है. यही वजह है कि अब मूर्तिकारों को भी आने वाले त्योहारों से काफी उम्मीदें हैं.
अपनी कला से मूर्तियों को जीवंत रूप देने वाले मूर्ति कारीगर मुफलिसी के दौर से गुजरने को मजबूर थे. कोरोना काल में खुशियों के साथ रोजगार भी छिन गया था. अब जब गणेश उत्सव करीब आया तो इन लोगों के मन में भी एक आस जगी है. पिछले कुछ दिनों से चक्रवर्ती मोहल्ले इलाके में मेन रोड पर मूर्तिकार कड़ी धूप में मेहनत कर रहे हैं. भगवान गणेश की प्रतिमाओं को आखिरी रूप देने में जुटे हैं. इनको उम्मीद है कि पिछले कुछ सालों से इन्हें जो नुकसान हो रहा है वह इस बार पूरा हो जाएगा. इलाके के मूर्तिकार का कहना है कि ग्राहक आ रहे हैं. ज्यादातर ग्राहक छोटी मूर्ति ही लेना पसंद कर रहे हैं क्योंकि महंगाई की वजह से अब बड़ी प्रतिमा काफी महंगी है. यहां शहपुरा नगर में मूर्तिकारों के पास 251 रुपए से लेकर 21,000 रुपए तक की गणेश प्रतिमाएं तैयार हैं. एक-एक मूर्तिकार एक दिन में 15 से 20 मूर्तियां बना रहा है. इन सब तैयारियों के बावजूद महंगाई यहां भी इन मूर्ति कारों और ग्राहकों का पीछा नहीं छोड़ रही है. महंगाई इतनी है कि ग्राहक भी ज्यादातर छोटी प्रतिमाएं लेना ही पसंद कर रहे हैं, क्योंकि बड़ी मूर्तियां ज्यादातर ग्राहकों के बजट से बाहर है. मूर्तिकारों ने बताया कि महंगाई के कारण इस्तेमाल में आने वाला रॉ-मटेरियल जिसमें, मिट्टी रंग, धान, भूसा, पैरा लकड़ी, बारदाना, ब्रश और गोंद आदि शामिल हैं खासा महंगे हो गए हैं. इसका सीधा असर उनके दुकानदारी पर भी पड़ रहा है. तमाम समस्याओं के बीच मूर्तिकार अभी भी उम्मीद लगा कर बैठे हैं कि आने वाले कुछ दिनों में ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी उनकी मूर्तियां उम्मीद के मुताबिक लोग खरीदेंगे और पिछले दो सालों से जो नुकसान और मार मूर्तिकार झेल रहे हैं उससे इन्हें छुटकारा मिलेगा
रिपोर्ट-सुनील ठाकुर


