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जूलर्स ने 11 करोड़ की संपत्ति दान की, पूरे परिवार के साथ चला वैराग्य धारण करने, शहर ने दी भव्य विदाई

Posted on

May 18, 2022

by india Khabar 24

बालाघाट मध्य प्रदेश

बालाघाट जिले का एक सराफा कारोबारी ने सांसारिक मोह माया का त्याग कर दिया है। परिवार के साथ वैराग्य पथ पर चलने के लिए 11 करोड़ की संपत्ति दान कर दी। इसके बाद शहर ने भव्य शोभा यात्रा निकालकर विदाई दी है।

जूलर्स ने 11 करोड़ की संपत्ति दान की, पूरे परिवार के साथ चला वैराग्य धारण करने, शहर ने दी भव्य विदाई
बालाघाट जिले के प्रतिष्ठित सराफा कारोबारी ने भौतिक जिंदगी त्याग दी है। भौतिक को सुख को त्याग कर यह कारोबारी पत्नी और बेटे सहित संयम की राह पर चल पड़ा है। इससे पहले कारोबारी ने 11 करोड़ रुपये की संपत्ति दान कर दी है। जरूरतमंदों को दान देने के बाद राकेश सुराना, उनकी पत्नी लीना और 11 साल का बेटा अभय अब जैन धर्म की दीक्षा लेकर आत्म कल्याण की राह चल पड़े हैं। 20 मई को जयपुर में जैन मुनियों के सानिध्य में वह दीक्षा लेंगे। इसके लिए बालाघाट शहर से रवाना हो गए हैं। शहर ने उन्हें भव्य शोभा यात्रा निकालकर विदाई दी है।
11 करोड़ की संपत्ति दान कर संयम पथ पर चला परिवार
पैसे कमाना और उसे भोगना ही जीवन नहीं… 11 करोड़ की संपत्ति दान कर संयम पथ पर चला परिवार
विदाई देने के लिए शहर में भव्य कार्यक्रम

सुराना परिवार को शहर से विदाई देने के लिए भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। मुमुक्ष राकेश, मुमुक्ष लीना और मुमुक्ष अभय सुराना के सम्मान में पूरा शहर उमड़ पड़ा था। जैन समाज ने तीनों का सम्मान, नवकारसी कार्यक्रम के पश्चात वर्षीदान, वरघोड़ा कस आयोजन किया, यह भव्य शादी समारोह से कम नहीं था। इसी प्रकार अष्टोत्तरी महापूजन, संयम संवेदना सह विदाई और आखिर में 19 मई को संसार से संयम की ओर विदाई कार्यक्रम होगा ।

20 मई को सभी करेंगे दीक्षा ग्रहण
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सुराना दंपति और उनका इकलौता बेटा 20 मई को जयपुर में जैन मुनियों कर सान्निध्य में विधिवत दीक्षा ग्रहण करेंगे । मुमुक्ष राकेश सुराना ने बताया कि वे बालाघाट में एक सफल और प्रतिष्ठित सराफा व्यवसायी के रूप में स्थापित हो चुके थे। फिर भी मन में संतुष्टि का भाव नहीं था। इसे संयोग ही कहेंगे कि उन्हें समान विचारों वाली पत्नी और पुत्र मिले जो आत्म उत्थान की राह पर चलने को सहर्ष तैयार हो गए।

पत्नी ने 2015 में ही दीक्षा लेने का बनाया था मन
-2015-

उनकी पत्नी लीना ने 2015 में ही जैन धर्म की दीक्षा लेने का मन बना लिया था लेकिन वे तैयार नहीं थे। पत्नी लीना का कहना है कि वे एक शिक्षिका हैं और अपना स्कूल चलाती हैं। उन्होंने बेंगलुरु से पोस्ट ग्रेजुएट किया और विदेश में भी पढ़ाई की है। 2015 में जब महेंद्र सागर महाराज चातुर्मास के लिए बालाघाट आए थे, तभी उनका मन वैराग्य की ओर हुआ था। उनके ससुर और ननद भी दीक्षार्थी बन चुके हैं। जहां तक बेटे अभय का सवाल है तो वह बचपन से ही आध्यत्म प्रवृत्ति का रहा है।

पैसा कमाना और भोगना जीवन नहीं

राकेश सुराना ने कहा कि पैसे कमाना और उसे भोगना ही जीवन नहीं है। जीवन का मूल अर्थ है, अपने आत्मस्वरूप को पहचानना क्योंकि इंसान की इच्छाएं कभी खत्म नहीं हो सकती। मुझे धर्म अध्यात्म और आत्म स्वरूप को पहचानने की प्रेरण गुरु महेंद्र सागर जी महाराज और मनीष सागर जी के प्रवचन और उनके सानिध्य में रहते हुए मिली।

11 करोड़ की संपत्ति दान की
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राकेश बालाघाट में सोने-चांदी के कारोबार से जुड़े हैं। उन्होंने अपने कारोबार छोटी सी दुकान से शुरू की थी। कड़ी मेहनत और अथक प्रयासों से क्षेत्र में शोहरत कमाई है। इस दौलत को त्यागकर यह परिवार अब संन्यास की राह पर चल पड़ा है।

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May 18, 2022

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