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समर्थ श्री भैयाजी सरकार का स्वास्थ्य बिगड़ा, अस्पताल में भर्ती!
575 दिन से अन्न आहार त्यागकर जीवनदायनी माँ नर्मदा के संरक्षण के लिए महाव्रत

Posted on

May 14, 2022

by india Khabar 24

जबलपुर मध्यप्रदेश


दादागुरु का स्वास्थ्य पुनः नाजुक
हॉस्पिटल में किया एडमिट

575 दिनों से निराहार सत्याग्रह महाव्रत कर रहे समर्थ सद्गुरु श्री भैयाजी सरकार आज बारना, गुघरा के तट से अल्प प्रवास पर नर्मदापुरम आए थे किंतु भीषण गर्मी के प्रकोप औऱ महाव्रत के चलते उनका स्वास्थ्य अधिक खराब हो गया अतः तत्काल उन्हें मदनमोहन हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा।
माँ नर्मदा के अस्तित्व की रक्षा और हमारे जीवन की सुरक्षा के लिए सत्याग्रह महाव्रत कर रहे सद्गुरु बहुत दिनों से अस्वस्थ हैकिंतु अपने स्वास्थ्य की तनिक भी परवाह न करते हुए वे माँ नर्मदा की अखंड परिक्रमा कर माँ नर्मदा की सुरक्षा के लिए निरंतर सामाजिक ,धार्मिक आयोजनों व बाल व युवा संवाद करते हुए हज़ारों किलोमीटर की यात्रा कर समाज को दिशा निर्देश देकर माँ नर्मदा के एवम प्रकृति पर्यावरण के संरक्षण, सम्वर्धन का कर्तव्यबोध करा रहे हैं जिसका सुखद परिणाम भी सामने है किंतु उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है यह बेहद चिंताजनक है।
दुखद पहलू यह है कि जहां से माँ नर्मदा की सुरक्षा के सभी नियम लागू हो सकते हैं वे गलियारे मौन हैं।
अतः जबाबदारों व जिम्मेदारों के इस असंवेदनशील व्यवहार से अब सम्पूर्ण भारत के सद्गुरु परिवार में रोष व्याप्त हो गया है। जल्द ही यदि इसका कोई हल नहीं निकाला गया तो शांतिपूर्ण चल रहे इस सत्याग्रह महाव्रत का रुख कड़ा हो सकता है।ये विश्व के 23 देशों के फैले गुरु परिवार औऱ नर्मदा भक्तों का संकल्प है।
आज नर्मदापुरम में आगमन पर फिर एक बार समर्थ श्री भैयाजी सरकार का स्वास्थ्य बिगड़ गया। कुछ दिन पूर्व नर्मदा सेवा यात्रा के पांचवे चरण में नर्मदापुरम में समर्थ श्री का स्वास्थ्य बिगड़ गया था जिससे उन्हें भर्ती किया गया था। अस्वस्थ स्थिति में व्हील चेयर पर अस्पताल से माँ नर्मदा की महा आरती में शामिल हुए और यात्रा के अगले पड़ाव की ओर बढ़ गए । यात्रा के दौरान खंडवा, बड़वानी, गुजरात में इलाज कराया गया। 575 दिन से निराहार रहना मेडिकल साइंस के लिए भी चिंतन का विषय बना हुआ है ।
माँ नर्मदा के अस्तित्व में लगातार आघात से समाज का जीवन भी संकट में आ गया है। लेकिन जवाबदार जिम्मेदार की संवेदनहीनता चिंताजनक है। जहां एक ओर समर्थ श्री स्वयं के जीवन को दांव पर लगाकर समाज को चेताने के लिए लगतार भ्रमण कर रहे हैं। वहीं जिम्मेदारों से जीवनदायिनी को जीवंत इकाई का दर्जा देकर संरक्षित करने का सत्य आग्रह कर रहे हैं लेकिन लाखों के जीवन पर जिम्मेदारों की नकरात्मकता आष्चर्यजनक है।

Posted on

May 14, 2022

by india Khabar 24

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