उमरिया जिले में आयुक्त के आदेश ठण्डे बस्ते में,
डिण्डौरी, शहडोल, अनूपपुर, सिवनी, बालाघाट सहित सभी जिले अव्वल,
उमरिया में अतिथि शिक्षक अब भी परेशान
उमरिया। जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त के निर्देशों के बाद मध्यप्रदेश के सभी आदिवासी जिलों में GFMS पोर्टल की खामी को दूर कर दिया गया है। लेकिन उमरिया जिला प्रशासन अभी भी इस आदेश को लागू करने में फिसड्डी साबित हो रहा है। न जाने इस मामले में उमरिया जिला प्रशासन कब कुंभकर्णी निंद्रा से जागेगा।
मामला अतिथि शिक्षकों के अनुभव अंकों का है। पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी के कारण ऑफलाइन अनुभव प्रमाण पत्र वाले शिक्षकों के अंक स्कोर कार्ड में नहीं जुड़ रहे थे। इस पर आयुक्त स्तर से निर्देश जारी हुए कि ऐसे शिक्षकों के अंक मैनुअली जोड़े जाएं।
जानकारी के अनुसार उमरिया जिले के सीमावर्ती जिले और शहडोल संभाग के अन्य जिलों में आयुक्त के निर्देशों का बखूबी पालन हो चुका है। जिनमें डिण्डौरी, सिवनी, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर सहित प्रदेश के सभी आदिवासी जिलों में इस निर्देश का पालन करते हुए अंतिम वरीयता सूची तैयार की जा रही है। 11 जुलाई 2026 को बालाघाट कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी पत्र इसका प्रमाण है।
लेकिन उमरिया जिले में आयुक्त के आदेश के बावजूद आज तक मैनुअल अंक नहीं जोड़े गए। नतीजा ये कि पिछले 4-5 साल से जनजातीय विभाग के स्कूलों में सेवाएं दे रहे अनुभवी अतिथि शिक्षक पोर्टल की गलती के कारण भर्ती से बाहर हो रहे हैं।
जब पूरे प्रदेश के आदिवासी जिले आयुक्त के आदेश को प्राथमिकता से लागू कर सकते हैं तो उमरिया में प्रशासनिक उदासीनता अतिथि शिक्षकों के भविष्य से खिलवाड़ करती नजर आ रही है जो सवालों के घेरे में है।
शिक्षकों का आरोप है कि सरकार “जनजातीय गौरव” और “डिजिटल एमपी” की बात करती है, पर जमीनी हकीकत ये है कि एक जिले की लापरवाही से दर्जनों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। जिससे सरकार की म़ंशा और अमल करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों के बीच का अंतर साफ नजर आ रहा है।
अखिलेश द्विवेदी की रिपोर्ट
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