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मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष डॉ. कैलाश जाटव ने कहा है कि अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारों की रक्षा तथा उनके लिए संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक है। वे जनप्रतिनिधियों एवं समाज के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
श्री जाटव ने कहा कि भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति के अधिकारों की सुरक्षा तथा उनके हितों के संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन में आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि कानूनों और नियमों का अध्ययन कर तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखेंगे तो संबंधित विभागों के समक्ष समस्याओं का निराकरण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
श्री जाटव ने कहा कि आयोग को प्राप्त सुझावों एवं शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। इसलिए समाज के प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों, विकास कार्यों तथा अनुसूचित जाति वर्ग के हितों से संबंधित सुझाव आयोग तक पहुंचाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि समस्याओं एवं मांगों से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों का संकलन कर आयोग को उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनका प्रभावी परीक्षण एवं निराकरण किया जा सके।
आयोग अध्यक्ष ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में समाज के लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों एवं शासकीय योजनाओं की जानकारी देने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।इसके साथ ही उन्होंने मप्र अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम 1995 के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव रखे तथा अनुसूचित जाति वर्ग के कल्याण एवं विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस अवसर पर आयोग के कार्यों एवं अधिकारों की जानकारी भी साझा की गई। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आशा मुकेश गोटिया, जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष संदीप जैन व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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