(प्रदेशभर में1.80 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, कहा- एक भर्ती में दो नियम क्यों)
भोपाल मप्र महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कर्मचारी चयन मंडल के जरिए पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा कराई जा रही है। इसमें महिला पर्यवेक्षक के 660 पद शामिल हैं। इस परीक्षा पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार प्रदेश की 1.80 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सिर्फ 5 वर्ष की छूट दे रही है।
यानी हम सिर्फ 45 साल आयु तक आवेदन कर सकती हैं। जबकि पूरे प्रदेश में केवल 1400 संविदा सुपरवाइजर को 15 साल की छूट दे दी गई हैं। यानी संविदा पर काम करने वाली महिलाएं 55 वर्ष की आयु तक आवेदन कर पा रही हैं। इस मामले में आंगनवाड़ी संगठनों ने भर्ती में गड़बड़ी की आशंका जताई है।
इतना ही नहीं मप्र के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका मिनी कार्यकर्ता संघ की तरफ से हाइकोर्ट में याचिका भी लगाई थी। जिसमें कोर्ट की तरफ से निर्देश दिया गया गया है कि मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी भर्ती में बराबर का अधिकार दिया जाए।
इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग की तरफ से भर्ती प्रक्रिया देख रहे संयुक्त संचालक राजेश प्रताप सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि कोर्ट का ऑर्डर अभी नहीं देखा है। प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है, इससे अधिक मैं कोई जवाब नहीं दे सकता।
इस छूट पर मचा है बवाल
विभाग ने विज्ञापन जारी करके 660 पद पर आवेदन बुलाए थे। इसमें आवेदन की अंतिम तारीख 23 जनवरी थी। इस तारीख से पहले ही विरोध शुरू हो गया था। क्योंकि भर्ती नियमों में सीधी भर्ती से आने वालों को 18 से 40 वर्ष आयु तक आवेदन का मौका दिया गया था। वहीं एससी, एसटी, ओबीसी, शासकीय कर्मचारी, नगर सैनिक, नि:शक्तजन और महिलाओं को 5 वर्ष की छूट दी गई।
इनके लिए स्पष्ट लिखा गया कि किसी भी स्थिति में 5 साल से अधिक आयु सीमा में छूट नहीं दी सकती। लेकिन संविदा कर्मियों के लिए बनाए गए नियमों में इन्हें 55 वर्ष तक की छूट दे दी गई। लिखा गया कि जो कर्मचारी संविदा के एक या अधिक पदों पर जितने वर्ष तक कार्यरत रहा, उसे उतने वर्ष की छूट मिलेगी और यह अधिकतम 55 वर्ष होगी।
इसी बात का विरोध आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा है। आंगनवाड़ी संघ की महामंत्री रंजना राणा ने कहा कि नियमित काम करने वालों से भेदभाव और संविदा पर काम करने वालों पर मेहरबानी क्यों?





