
भोपाल मध्यप्रदेश
मप्र शासन अगले वर्ष से प्रदेश में समर्थन मूल्य की खरीदी बंद करने की तैयारियों में जुट गई है। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के स्थान पर अब शासन खुले बाजार में आनाज और उद्यानिकी फसले बैचने पर होने वाले नुकसान की राशि की भरपाई सरकार किसानों के बैंक खातों में सीधे करेंगी। इसके लिए सरकार एक नई योजना बनाने की तैयारियों में लग गई है। इस योजना को सीएम भावातर भुगतान योजना नाम देने की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
….तो हो रहा था नुकसान
किसानों से लगातार दो वर्ष से प्याज खरीदी में करोड़ों में घाटा उठाने में और अनियमित्ताएं उजागर होने के बाद अब सरकार इस तैयारी में है कि किसानों से फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं की जाएगी। इसके स्थान पर जिन फसलों का समर्थन मूल्य घोषित होगा उनके मामले में बाजार में विकने वाले अनाज के दाम समर्थन मूल्य से 5. प्रतिशत से कम मिलने की स्थिति में सरकार इस अंतर को राशि को किसानों के बैंक खाते में सीधे जमा करेगी। इसके अलावा किन फसलों के समर्थन मूल्य तय नहीं है उसमें सरकार उस अनाज या उद्यानिकी फसल के देश में सर्वाधिक अच्छे मूल्य देने वाले राज्यों के मूल्य प्राप्त करेंगी।
बनेगी नई योजना
ज्ञात हो कि जिले में लगातार गेहूं उपार्जन खरीदी का जिम्मा नागरिक आपूर्ति निगम जिला सहकारी बैंक एवं समितियां एवं संस्थाओं के माध्यम से गेहूं खरीदी की जाती थी परन्तु अब शासन अगले वर्ष से गेहूं खरीदी बंद करने की चर्चाएं जोरों पर होने से जिला सहकारी बैंक एवं समितियों की एक आय का स्त्रोत बंद हो जाएगा जिससे समितियों को चलाने में काफी दिकतों का सामना करना पड़ेगा। वर्तमान में जिले में 113 समितियां कार्यरत है जिनको खाद बीच एवं गेहूं उपार्जन से लाखों का कमीशन मिलता था जिससे वह समितियां मजबूत होते हुए
शासन के निणर्य से किसानों में निराशा
नहीं होगी परेशानी
के गेहूं खरीदी बंद करने के निर्णय से एक साथ कई विभागों का दिवाला निकल सकता है क्योंकि जिला सहकारी बैंक एवं समितिया किसानों को जो सुविधाएं अब अगर गेहूं खरीदी अगले वर्ष बंद होती है तो जिला प्रदान करती भी उक्त सुविधाएं अब किसानों को
अपने कर्मचारियों को वेतन दिया करती थी, परन्तु सहकारी बैंक, नागरिक आपूर्ति विभाग, कृषि उपज मुमकिन नहीं होगा। मंडियों का अस्तिव जरूर समाप्त हो जाएगा क्योंकि उपलब्ध करोड़ों में हो जाया करती थी, उक्त मंडी निधी से विकलांगों एवं लोक निर्माण विभाग को 1 प्रतिशत की राशि प्रदान की जाती थी परन्तु अब जबकि गेहूँ
गेहूं खरीदी मंडी में होने से मंडी को भी मंडी निधी ये फसले होंगी शामिल
उद्यानिकी फसलों में प्रमुख रूप से प्याज, आलू, लहशन, केला, संतरा के साथ अनाज में चना, मसूर, उड़द खरीदी बंद होने का शासन निर्णय लेती है तो मंडियों तुअर, मूंग, सोयाबीन जैसी फसलों को शामिल किया गया में होने वाली एक आय पर विराम जरूर लग जाएगा। है। वहीं साथ ही साथ जो किसान अपनी उपज मंडी में वहीं नागरिक आपूर्ति विभाग भी करोड़ों की राशि जिला बेचेंगे उन्हें ही इस योजना का लाभ दिया जाएग। मंडी के सहकारी बैंकों के खाते में प्रदान करती थी और जिला बाहर बैचने वाले किसानों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। सहकारी बैंक उक्त राशि से शाखा प्रबंधक एवं वहीं कम सबसिडी वाली योजनाओं को भी बंद करने का समितियों को प्रदान करती थी एवं करोड़ों की राशि निर्णय लिया जा रहा है जिनमें 2 हजार या उससे कम स्टैट बैंक, एक्सीस बैंक, आईसीआई के खाते में जमा सब्सिडी मिलती भी इन योजनाओं में शिकायतें प्राप्त होने के होने से बैंक का भी लक्ष्य पूरा हो जाता था परन्तु शासन बाद बंद करने का निर्णय लिया जा रहा है।



