जबलपुर। नगर निगम जबलपुर द्वारा एक ओर जहां शहर के वीआईपी क्षेत्रों में कचरा पृथक्करण और स्वच्छता जागरूकता अभियान के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की प्रतिष्ठित कही जाने वाली जसूजा सिटी फेज-1 की जमीनी हकीकत ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी है। कहने को तो यह एक वीआईपी कॉलोनी है, लेकिन यहां के रहवासी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
जागरूकता अभियान के दौरान ही स्थानीय रहवासियों का दर्द छलक पड़ा। नागरिकों ने भारी मायूसी और पीड़ा जताते हुए कहा कि कॉलोनी में न तो नालियों का निर्माण हुआ है, न ही बिजली के खंभों और स्ट्रीट लाइट की उचित सुविधा है। हद तो यह है कि इतनी बड़ी कॉलोनी होने के बावजूद यहां अब तक पानी की पाइपलाइन तक नहीं बिछाई गई है, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसके साथ ही रहवासियों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शिकायत की कि इलाके में कचरा कलेक्शन गाड़ी भी नियमित रूप से नहीं आती है और अक्सर 4-4 दिन तक गाड़ी का अता-पता नहीं रहता। ऐसी बदहाल स्थिति में घरों में कचरा जमा होने लगता है, जिससे गंदगी और बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। रहवासियों का कहना है कि बुनियादी ढांचे (नाली, बिजली, पानी) के अभाव और कचरा गाड़ी न आने के कारण इस वीआईपी कॉलोनी में रहना दूभर हो गया है। स्थानीय जनता ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि केवल कागजी अभियानों की जगह जमीनी स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि उन्हें इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।
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