शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल स्थित बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से मानवता और स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक बेहद विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में स्ट्रेचर जैसी अति-आवश्यक सुविधा न मिलने के कारण परिजनों को एक बुजुर्ग बीमार महिला को चादर के सहारे उठाकर डॉक्टर के चैंबर और वार्ड तक ले जाना पड़ा। यह दर्दनाक वाकया सरकार के दावों और अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों की जमीनी हकीकत बयां कर रहा है।
चादर बनी ‘स्ट्रेचर’, सिस्टम हुआ लाचार
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम कुदरी (वार्ड क्रमांक-11) की पंच सावित्री कुशवाहा अपनी सास की कमर की हड्डी टूट जाने के कारण उपचार कराने मेडिकल कॉलेज पहुंची थीं। परिजनों का गंभीर आरोप है कि उन्होंने अस्पताल परिसर में काफी देर तक स्ट्रेचर की तलाश की। वहां ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों और वार्ड बॉय से भी मिन्नतें की गईं, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। जब दर्द से तड़पती बुजुर्ग महिला की हालत देखी नहीं गई, तो परिजनों ने मजबूरी में चादर का सहारा लिया और उसे झोली की तरह उठाकर डॉक्टर के कक्ष और वार्ड तक ले गए।
करोड़ों के सरकारी दावों की खुली पोल
एक तरफ केंद्र और राज्य सरकारें ‘आयुष्मान’ और स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण योजनाओं के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके उलट है। मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान में मरीजों को एक अदद स्ट्रेचर या व्हीलचेयर तक नसीब न होना, सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता को दर्शाता है।
दूर-दराज के आदिवासियों और ग्रामीणों पर क्या गुजरती होगी?
स्थानीय नागरिकों ने इस घटना पर कड़ा आक्रोश जताया है। लोगों का कहना है कि जब मेडिकल कॉलेज से महज 200 मीटर की दूरी पर रहने वाले स्थानीय जनप्रतिनिधि (पंच) के परिवार को इलाज के लिए इस तरह की प्रताड़ना और अपमान से गुजरना पड़ रहा है, तो संभाग के सुदूर वनांचलों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले सीधे-साधे गरीब आदिवासियों का क्या हाल होता होगा?
क्षेत्र की जनता ने मामले पर संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रबंधन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने और तुरंत पर्याप्त मात्रा में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
शहडोल से सत्येन्द्र सोनी
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