दुलीचंद मार्को संवाददाता
निवास/मंडला: पेसा कानून 1996 की कंडिका 4 (घ) के अनुसार प्रत्येक ग्राम सभा अपनी रूढ़ि परंपराएं एवं धार्मिक प्रथाओं का संरक्षण एवं परिक्षण करने हेतु सक्षम है। जिससे दिनांक 26 सितम्बर 2024 को पेसा एक्ट के अंतर्गत ग्राम सभा का आयोजन किया गया तथा मंगलू सिंह तेकाम अपनी बीमार पत्नी के स्वस्थ्य सुधार हेतु ईसाई धर्म अपना लिया गया था, परन्तु देवगति अनुसार उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो जाने से ग्रामवासीयों द्वारा उन्हें रूढ़ीवादी पुरानी परम्परा के अनुसार पुनः अपने धर्म (गोंडीं) में मिलाने के लिए सर्व सम्मति से निर्णय लेकर प्रस्ताव पारित किया गया।

ग्राम सभा बैठक में उपस्थित पेसा एक्ट ग्राम सभा अध्यक्ष राधेलाल कुंजाम,मोबिलाईजर गायत्री कुंजाम, ग्राम सभा के सदस्य एवं सर्व ग्रामवासी मौजूद रहे।
यह मामला आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के विकासखण्ड निवास अंतर्गत ग्राम पंचायत हरिसिंगौरी के मंगलू सिंह तेकाम ने अपने गांव से गोंड समाज की रूढी प्रथा परंपरा एवं धार्मिक प्रथाओं को छोड़कर अन्य विचारधारा में चले गए थे। उन्होंने स्वयं बताया कि मेरी पत्नी के गम्भीर बीमारी के कारण मेरा मन भ्रमित किया गया। और पत्नी के इलाज के नाम से हमारी सैकड़ों साल से चली आ रही रूढ़ी प्रथा परंपरा को छोड़ने को कहा गया।

परंतु में समझ गया कि अपनी गोंड समाज की रूढी प्रथा परंपरा जो समाज प्रकृति को ही ईश्वर का रूप मानती है। प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ जीवन जीती है हमारी संस्कृति और हमारा विश्वास यह अलग बात नहीं है। में भ्रमित होने के कारण गोंड रीति रिवाज रूढ़ी प्रथा परंपरा को छोड़ चुका था। उसे फिर में अपने स्वेच्छा से अपना रहा हूं और मुझे ग्राम सभा सदस्यों द्वारा स्वीकारा गया।
जिससे रूढ़ी प्रथा परंपरा के अनुसार ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित के अनुसार मैंने मीठा, मिठाई एवं राशि 750 रुपए मात्र ग्राम कोष खाते में जमा की है। और आज मैं अत्यंत खुश आनंद मय और साथ ही परिवार में खुशी का माहौल छाया हुआ है। कि मेरी पुनः घर वापसी तथा जात भीतरी हुआ है।



