
लालबर्रा। बालाघाट मध्यप्रदेश
शारदेय नवरात्र आरंभ हो चुका है नवरात्रि के दूसरे दिन मां जगत जननी के नौ रूपों में एक मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना करने का विधान है मानव शक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली देवी का यह स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है मां ब्रह्मचारिणी की साधना उपासना से तप त्याग वैराग्य सदाचार और संयम की वृद्धि करता है मां ब्रह्मचारिणी के हाथों में तप की माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण किए हुए है। पूर्व जन्म में देवी ने हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था और नारद जी के उपदेश से भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी और भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त किया, कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपस्या चारणी व ब्रह्मचारिणी के नाम से अभिहित किया गया मां ब्रह्मचारिणी की विधि पूर्वक पूजा अर्चना और उपासना करने से भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होती है और पापों का विनाश होता है।


