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ग्वालियर में हाउसिंग बोर्ड की योजनाओं पर भारी अफसरों की सुस्ती, हितग्राही हो रहे परेशान

Posted on

July 21, 2022

by india Khabar 24

ग्वालियर मध्य प्रदेश

ग्वालियर शहर में प्रस्तावित मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड की परियोजनाओं पर अफसरों की सुस्ती भारी पड़ रही है। बोर्ड की गिरनार परिसर और सूर्य नगर जैसी परियोजनाओं में बुकिंग के बावजूद हितग्राहियों को पजेशन नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि पद्मावती नगर और महाराजा सिटी प्लाजा को अनुमति मिलने के बाद भी काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। सबसे अधिक लापरवाही थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना में की गई, जहां सिर्फ स्वीकृति पत्र जारी करने में देरी का हवाला देकर ठेकेदार ने पहले चरण का काम ही छोड़ दिया। अब बोर्ड द्वारा दोबारा टेंडर किए जा रहे हैं और इससे राजस्व की भी हानि होगी। इसके अलावा सूर्य नगर और गिरनार परिसर जैसी योजनाओं में बुकिंग कराने वाले हितग्राही भी पजेशन के लिए परेशान हो रहे हैं।

थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण परियोजना के पहले चरण में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से 368 फ्लैट, स्कूल बिल्डिंग, आफिस काम्प्लेक्स और कम्युनिटी सेंटर के निर्माण कार्य के लिए अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया की जा रही है, क्योंकि 36 करोड़ रुपये कम में काम लेने वाली अहमदाबाद की फर्म ज्योति इंफ्राटेक कंपनी ने टेंडर की वैधता अवधि समाप्त होने का हवाला देकर काम छोड़ दिया था। इस कार्य के लिए हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को गत चार फरवरी से पहले ठेकेदार को स्वीकृति पत्र जारी करना था, लेकिन अफसरों ने एक महीने की देरी से यह काम किया। इसके चलते फर्म ने काम छोड़ दिया। हालांकि इसके पीछे निर्माण सामग्री महंगा होने को कारण माना जा रहा था। इसी प्रकार गिरनार परिसर योजना भी लगभग 10 साल के बावजूद पूरी नहीं हो पा रही है। सूर्य नगर योजना के लिए भी अफसरों ने जिला प्रशासन से 23 हेक्टेयर भूमि लेकर इसे ऐसे ही छोड़ दिया है। इस योजना में बाकी बचे 81 फ्लैटों की बुकिंग के लिए हाउसिंग बोर्ड ने पिछले महीने विज्ञापन जारी किया है, लेकिन जिन फ्लैटों की बुकिंग हो चुकी है उनके हितग्राहियों को पजेशन नहीं दिया गया है।

आयुक्त ने जताई थी नाराजगीः ग्वालियर में हाउसिंग बोर्ड की लेटलतीफ परियोजनाओं को लेकर पिछले दिनों आयुक्त भरत यादव ने समीक्षा बैठक की। इसमें यह तथ्य सामने आया कि अधिकतर परियोजनाएं शुरू ही नहीं हो पाई हैं। इसके अलावा जो परियोजनाएं चल रही हैं, उनकी गति भी धीमी है। इस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। ऐसा न करने पर उन्होंने संबंधित इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी थी। इसके बावजूद अफसर परियोजनाओं में रुचि नहीं ले रहे हैं।

शासन को कर रहे लीज रेंट का भुगतानः परियोजनाएं शुरू न होने और शुरू हो चुकी परियोजनाएं समय से पूरी न होने के कारण हाउसिंग बोर्ड को राजस्व का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बोर्ड ने बरैठा, लक्ष्मणगढ़, लखनीपुर, गिरवाई आदि क्षेत्रों में लगभग 40 हेक्टेयर भूमि शासन से लीज पर ले रखी है। परियोजनाओं में काम समाप्त न होने से अभी बोर्ड को हर साल लगभग 22 लाख रुपये का लीज रेंट जिला प्रशासन को देना पड़ रहा है। यदि परियोजनाएं पूरी हो जातीं और यहां हितग्राहियों को पजेशन मिल जाता, तो यह राशि हितग्राहियों से ली जाती।

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July 21, 2022

by india Khabar 24

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