सिवनी//ज़िले की जनपद पंचायत घंसौर अंतर्गत ग्राम पंचायत गोल्हिया में जलसंवर्धन योजना के अंतर्गत निर्मित दो तालाबों के एक साथ फूटने से न सिर्फ सरकारी राशि का दुरुपयोग उजागर हुआ, बल्कि ग्रामीणों की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया। भारी बारिश के शुरुआती दौर में ही दोनों तालाबों की मिट्टी दरक गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का घोर अभाव रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब एसडीओ, उपयंत्री और ग्राम पंचायत सचिव की मिलीभगत का परिणाम है। बताया गया कि तालाबों के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और कई जरूरी तकनीकी मापदंडों की अनदेखी की गई। स्थानीय लोगों ने पहले भी काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे, लेकिन उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया।
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सवाल यह उठता है कि जब जल संरक्षण जैसी गंभीर योजना के तहत लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी कार्य की गुणवत्ता पर निगरानी क्यों नहीं रखते? क्या यह सब जानबूझकर अधिकारियों और ठेकेदार की सांठगांठ का नतीजा है?
अब जबकि दोनों तालाब एक साथ फूट चुके हैं, जनपद और जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है कि दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाए। लेकिन अभी तक सिर्फ जांच की बात हो रही है, कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण कार्य की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए और दोषियों को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि प्रशासन भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रहा है। साथ ही, प्रदेश सरकार की जलसंवर्धन योजना की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
अब देखना होगा कि कलेक्टर सिवनी व जनपद सीईओ इस गंभीर मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और क्या वाकई दोषियों को सज़ा मिलती है या फिर यह मामला भी अन्य भ्रष्टाचार मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।





