अजय कर्वेती कुरई
गलत इलाज से जा चुकी है लोगों की जान
यू तो सिवनी जिले के गांव-गांव में बाहरी प्रदेशों से आए झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है।
किन्तु आदिवासी बाहुल्य कुरई विकासखंड के हर दूसरे गांव में इन झोलाछाप डॉक्टरों ने अपनी दुकान सजा रखी है।।
वही इनके गलत इलाजों से कई बार कई मरीज असमय ही काल के गाल में समा चुके हैं किंतु जानकारी होने के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग मूकदर्शक बनकर इन फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरो के कारनामे खामोशी से देख रहा है। जिससे लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं ।
चाय की टपरियों से लेकर घर की डिस्पेंसरी तक इलाज की सुविधा
कुरई क्षेत्र में इन झोलाछाप डॉक्टरों की इलाज की शैली भी अजब गजब हे ।
कोई मोटरसाइकिल से गांव-गांव घूम कर इलाज करता है , तो किसी की सप्ताह में एक दिन मिलती हैं सुविधा।
चाय की टपरियों जैसी दुकानाें में झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। वही मरीज के घर पहुंचकर भी सुविधा दी जा रही है।।
कुछ डाक्टरों पास है खास अनुभव,तो कुछ पुश्तों से इलाज करने की हांकते हैं डींग
हर मर्ज के इलाज का बताते हैं स्पेशलिस्ट
सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के भोले भाले और कम पढ़े लिखे लोगों को अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में उलझा कर इन झोलाछाप डॉक्टरो द्वारा अपनी दुकानदारी वषों से चलाई जा रही है।
जिनके पास में हर बीमारी का इलाज होता है , मरीज चाहे उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार से पीड़ित ही क्यो न हो या फिर अन्य कोई बीमारी से। सभी बीमारियों का इलाज यह झोलाछाप डॉक्टर करने को तैयार हो जाते हैं।
कुरई क्षेत्र में दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां आज भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसका फायदा सीधे तौर पर झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं। बीमार होने पर झोलाछाप डॉक्टरों से ही इलाज कराना पड़ता है।
अपने चमचमाते बोर्डो पर लिखवाते है कई प्रकार की डिग्रियां
दीवारों में सजे रहते हैं तरह तरह की डिग्रियों के फ्रेम
इन झोलाछाप डॉक्टरों ने अपनी अच्छी खासी डिस्पेंसरी सजा रखी है जहां उनकी दीवारों पर अनेको प्रकार की डिग्रियां सजी हुई दिखती हैं। अब इन डिग्रियों की वास्तविकता क्या है ? यह तो डिग्रीधारी डाक्टर ही बता सकते हैं। वही अगर इतनी अनुभव की डिग्रियां हे तो इन डॉक्टरों को अच्छे बड़े कस्बों में डिस्पेंसरी खोलने के बजाय सुदूर ग्रामीण अंचलों के छोटे छोटे गांव में डिस्पेंसरी चलाने की क्या जरूरत आन पड़ी है सवाल यह भी संदेह पैदा करता है।
लाइसेंस का कोई पता नहीं पर रहता है अवैध रूप से दवाओं का स्टॉक
ज्यादातर झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा बिना पंजीयन के एलोपैथी चिकित्सा का व्यवसाय ही नहीं किया जा रहा है। बल्कि बिना ड्रग लाइसेंस के दवाओं का भंडारण व विक्रय भी अवैध रूप से किया जा रहा है।
इनकी दुकानों के अंदर दवाओं का अवैध स्टॉक छिपाकर रखा जाता है।
मौसम परिवर्तन होने के साथ ही बढ़ जाती है मरीजों की संख्या
ग्लूकोज की बोतल लगाने से शुरू होता है इलाज का दौर
मौसमी बीमारियों के कहर के साथ ही झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें मरीजों से भर जाती हे । बदलते तापमान के कारण उल्टी, दस्त, बुखार जैसी बीमारियो की ज्यादातर समस्या होती हे वहीं झोलाछाप डॉक्टर इलाज की शुरुआत ग्लूकोज की बोतलें लगाने से शुरू करते हैं। एक बोतल लगाने के लिए 200 से 300 रुपए तक मरीज से वसूले जाते हे।
वही अनेकों प्रकार के इंजेक्शन लगाने का भी 500 से 1000 रुपए इन डॉक्टरों द्वारा लिया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के ध्यान नहीं देने पर झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इलाज के कारण कई लोगों की जान चली गई है
विगत दिनों कुरई के पीपरवानी क्षेत्र के एक डॉक्टर द्वारा एक युवक को गलत इंजेक्शन लगाने के कारण कुछ ही घंटे में उस युवक की मौत हो चुकी है । ऐसे ही कई मामले इन क्षेत्रों में हुए हैं । सूत्रों ने तो यह तक बताया कि केस बिगड़ने पर “नोटों की ताकत” में कई मामलों में लोगों का मुंह बंद करके मामले को रफादफा कर दिया गया ।
गलत इलाज से लोगों की जाने जा रही हे लेकिन झोलाछाप डॉक्टरों पर ग्रामीण क्षेत्र में यदा कदा ही कार्रवाई देखने को मिली है। झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं और प्रशासन दूर से ही मौन होकर इन्हें देख रहा है।
मकड़जाल से फैल गए है बाहरी प्रदेशों से आए हुए झोलाछाप डॉक्टर
बीते कुछ वर्षों से फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों की वृद्धि हुई है।
जिनमें से ज्यादातर यह बाहरी प्रदेशों से आए हुए हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में कोई फर्स्टएड का डिग्रीधारी हैं तो कोई बवासीर का ओर कोई दंत चिकित्सक बताते हैं। हा लेकिन इनके निजी क्लीनिकों में लगभग सभी गंभीर बीमारियों का इलाज धड़ल्ले से खुलेआम किया किया जाता है।
बड़े शहरों में मिलने वाली लैब की सुविधा आखिर छोटे छोटे गांव में पहुंच ही गई
कुछ डॉक्टरों ने तो अपनी क्लिनिक में मल्टीलेवल की लैब सजाते हुए अपने आने वाले मरीजों को क्लिनिक में ही खून पेशाब जांच की सुविधा भी दे रखी है। अब उनके यहां होने वाली खून पेशाब की जांच की रिपोर्ट किस टेक्नीशियन द्वारा तैयार की जा रही है यह तो रब ही जाने।
सरकारी अस्पतालों पर पदस्थ हे स्वास्थ कर्मी ..यदा कदा आते है मरीज
वैसे तो कुरई क्षेत्र के ज्यादातर ग्रामों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,उप स्वास्थ्य केंद्र , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं प्रदान की गई हे । जहां निशुल्क दवाओं के साथ इलाज की सुविधाए उपलब्ध हे । किन्तु इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर यदा कदा ही मरीजों की आवाजाही होती है । वही इन बिना डिग्रीधारी डॉक्टरो के यहां मरीजों की लाइन लगी होती है।
इस विषय पर जब ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा करने पर यह बात भी सामने आई है कि ज्यादातर उप स्वास्थ्य केंद्रों में ताला लटकता रहता है इस कारण मजबूरी में लोगों को इन प्राइवेट डॉक्टरों के पास इलाज करवाना पड़ता है।
अगर ऐसी स्थिति है तो स्वास्थ्य विभाग को बेहतर सुविधाओं के साथ सभी शासकीय अस्पतालों पर सख्त होते हुए स्टाफ को हमेशा उपलब्ध रहने हेतु आदेशित करना पड़ेगा।
वहीं स्वास्थ्य विभाग के अमले को कड़े कदम उठाते हुए ईमानदारी से अभियान चला कर इन ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से लूट की दुकान सजाकर बैठे इन फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टर जो ग्रामीण क्षेत्रों में भोले भाले लोगों को इलाज के नाम पर खुलेआम जेब काट करके अपनी अकूत संपत्ति बनाकर बैठे हैं इनकी जांच करके इन पर कार्यवाही करनी चाहिए।
ताकि इनके द्वारा किए जा रहे गलत इलाजों से आगे किसी व्यक्ति की असमय मृत्यु न हो।


