जबलपुर,
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने जिले के किसानों को अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिये मई माह
के दौरान खेत की मिट्टी का परीक्षण कराने तथा परीक्षण में निकले निष्कर्षों के आधार पर ही फसल में उर्वरकों के
इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
किसान कल्याण तथा कृषि विभाग के उपसंचालक रवि आम्रवंशी के मुताबिक उर्वरक तथा कीटनाशकों के
बेहिसाब उपयोग से खेतों की मृदा का स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है। उन्होंने मई माह को मृदा परीक्षण के लिये
सर्वोत्तम समय बताते हुये कहा है कि यदि मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा नहीं की जायेगी और उसका ध्यान नहीं रखा
जायेगा, अच्छा पोषण युक्त खाद्यान्न, दलहन, तिलहन, फल-सब्जी तथा पशुओं के लिए पौष्टिक चारा प्राप्त नहीं किया जा
सकता ।
रोजगार पर सवाल करने वाले जवाब दें…
क्या रोजगार मिले बिना ही 10 साल में 55 हजार किलोमीटर से अधिक हाईवे सड़कों का निर्माण हो गया? pic.twitter.com/qg3V65MCJN
— BJP Madhya Pradesh (@BJP4MP) May 10, 2024
उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास के अनुसार फसलों का बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिये
मिट्टी में 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसमें से कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन पानी एवं वायुमंडल के
माध्यम से प्राप्त होता है । जबकि नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश मुख्य पोषक तत्व होते हैं जिनकी पूर्ति उर्वरकों के
माध्यम से की जाती है । इनके अलावा कम आवश्यकता वाले कैल्शियम, मैग्नीशियम सल्फर जैसे द्वितीयक पोषक तत्व
तथा जिंक, आयरन, कॉपर, बोरॉन, मैगनीज, मोलिब्डिनम एवं क्लोरीन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति मृदा विश्लेषण के
आधार पर ही करना चाहिए। मिट्टी की जांच में इन्हीं 12 पोषक तत्वों की जांच की जाती है। इससे पता चलता है कि
मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है। इसके बाद किसान रासायनिक उर्वरक एवं पोषक तत्व संतुलित मात्रा में
अपने खेतों में डालकर अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
श्री आम्रवंशी के मुताबिक फसल कटाई के बाद खेत के बीच से और चारों कोनों से फावड़ा या खुरपी की सहायता से
अंग्रेजी वर्णमाला के "व्ही" अक्षर के आकार का कट लगाकर ऊपर से नीचे की तरफ 6 इंच की मिट्टी के नमूने लेना
चाहिये तथा सभी नमूनों की अच्छी तरह मिलाकर उसमें से 500 ग्राम मिट्टी एक कपड़े की थैली में भरकर जांच हेतु
कृषि विभाग की प्रयोगशाला भेजना चाहिये या अपने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारियों को देना चाहिये । उन्होंने बताया
कि प्रयोगशाला में मृदा का विश्लेषण निःशुल्क किया जाता है ।
बेहतर भविष्य के साथ ही कांग्रेस आपको देगी स्वस्थ जीवन भी। हर ज़िले में खुले नया मेडिकल कॉलेज और 25 लाख तक के मुफ्त इलाज की गारंटी।#Nyay @kharge #हाथ_बदलेगा_हालात pic.twitter.com/mb3s1O2vyA
— Lakhimpur Kheri Congress Sevadal (@SevadalLMK) May 11, 2024
उपसंचालक किसान कल्याण ने खेत की मृदा का विश्लेषण तीन वर्ष में एक बार कराने की सलाह भी किसानों
को दी है । उन्होंने कहा कि खेत की मिट्टी का नमूना लेते समय ध्यान रखना चाहिये कि कभी भी पेड़ के नीचे से, मेढ़ों
के किनारे से, जहां खाद पड़ी हो और गड्डे वाले स्थान से नमूने नहीं लेना चाहिये। मिट्टी के नमूना हमेशा साफ जगह से
ही एकत्र किये जाने चाहिये तथा इसमें आये कचरे और कंकड़ आदि को अलग कर देना चाहिये।


