
नरसिंगपुर मध्यप्रदेश
दूसरी कड़ी में देखिए ,पढ़िए – फर्जी किराए के वाहनों बिल , हमे मिले जिसमें जिन गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग नहीं हुई , जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ , उनको भी किराए पर ले लिया , महोदय ने और जब आरटीआई लगी , शिकायत हुई तो जांच के नाम पर 3 साल हो गए , लेकिन अभी तक जांच ही चल रही है जो भी सीएमएचओ आता है वह घंटी बजा कर ऐसे ही लूट कर जा रहा है l एनआरएचएम में करोड़ों का बजट नरसिंहपुर जिले के लिए आवंटित होता है, कहां जाता है ? वह आपको मालूम चलेगा इन बिलों को देखकर ऐसे ही फर्जी बिल लगाकर उनका उपयोग अधिकारी , कर्मचारी, नेताओं की जेब में जाता है ,आज जिला चिकित्सालय में ही नहीं बल्कि संपूर्ण जिले की अस्पतालों में बड़ी बड़ी बिल्डिंग बना कर रख दी हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं, वहां स्टाफ की कमी है, वहां मशीनों की कमी है और यदि है अभी तो उन्हें संचालित करने वाला नहीं है, और यदि संचालित करने वाला भी है , तो प्राइवेट अस्पतालों के कमीशन के लिए उनको चलाया नहीं जाता l

आज जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कई फर्जी संस्थान काम कर रहे हैं l उनसे भी यह कमीशन खाते हैं , ड्रग में भी कंट्रोल के नाम पर अच्छी खासी राशि वसूली जाती है , लेकिन फिर भी इस प्रकार के फर्जी बिल ! जो काम हो ही नहीं रहे , जो वस्तुएं खरीदी ही नहीं जा रही , फर्जी वेंडर बनाकर. भुगतान क कर दिया जाता है l
अब प्रश्न उठता है, इस बात का हमारे जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधि सांसद, विधायक , मंत्री ,मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि और स्वयं वह श्रीमान जी , महोदय , लाडले , जनप्रिय , चहेते महाशय. और दूसरे आओ जिन्हें हम जिले की मुखिया कलेक्टर , संभाग के मुखिया – कमिश्नर , प्रदेश की विभागीय सचिव , मंत्री , मुख्यमंत्री तक समय-समय पर बैठ कर लेते हैं। और प्रत्येक विभाग में उनके अलग-अलग विंग ,विभाग होते हैं जिसे हम यदि बांटे तो हर विभाग में लेखा शाखा होती है, प्रशासनिक विभाग होता है ,और मूल काम करने वाले टेक्निकल स्टाफ होता है ,फील्ड स्टाफ होता है ,स्थापना शाखा होती है, सब के अलग-अलग एक्सपर्ट होते हैं । अब वित्त से संबंधित जो प्रक्रिया होती हैं वह लेखा शाखा से संचालित होती हैं ,समय-समय पर उनका ऑडिट होता है, और ऑडिट भी तीन प्रकार का होता है, लोकल स्तर पर ,सीए स्तर पर और विभागीय ऑडिट टीम भी समय-समय पर आडिट करती है उन्हें सरकारें किस बात की तनख्वाह दे रही हैं जो ऐसे फर्जी बिलों को भी सही बता कर भुगतान कर देते हैं , आपत्ति नहीं लगाती और जब जांच में आता है , पकड़ में आता है , तो मुझे लगता है कि वित्त विभाग मैं वित्त आचार संहिता और वित्तीय नियमों को भली भांति जानता है कि जब कोई अधिकारी कर्मचारी एक रुपए का भी अपव्यय करता है या लोक हित में खर्च ना करके अपने हितों को साधता है तो उस पर गबन का प्रकरण दर्ज कर विभागीय जांच करवा कर उसे बर्खास्त कर देते हैं , लेकिन अभी वर्तमान में जो भाजपा शासन चल रहा है इसमें चोरों से की गई चोरी यदि पकड़ी जाती है तो माल बरामद करके अर्थात यदि किसी प्रकार की चोरी है की जाती है तो उसकी वसूली कर ली जाती है और उसको आशीर्वाद दिया जाता है कि भाई अब यदि चोरी करना तो यह छोटी की है इससे बड़ी करना और जो अभी खर्च हो गए हैं जांच में यह सब वसूल करते हुए सब कुछ लिखा पढ़ी में सही रखना इतनी छूट के बावजूद भी यह फर्जी बिल लगाना क्या यह पढ़े-लिखे नहीं है क्या इन में योग्यता नहीं है कि सरकार कह रही है गबन करो लेकिन सही दिल लगाकर हम यदि साबित हो जाएगा गबन तो हम उसकी वसूली कर लेंगे तुम्हारी नौकरी नहीं खाएंगे यही हो रहा है

भ्रष्टाचार के मामलों में भाजपा सरकार का वसूली अभियान चल रहा है भ्रष्टाचार करके लाओ पकड़े जाओ तो जितना भ्रष्टाचार साबित हुआ है उसे जमा कर दो और फिर लग जाओ उससे बड़ा भ्रष्टाचार करने में यही तो एक बहुत बड़ी सुविधा है योजना है । लगता है अब गबन शब्द ही सरकार ने बदलकर वसूली कर दिया हो गबन की धारा ही समाप्त कर दी हो क्योंकि अब छोटे से लेकर बड़े वित्तीय अनियमितताओं पर या घोटालों पर गबन शब्द या गवन को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया है और यदि नहीं हटाया गया है तो ऐसे हो रहे भ्रष्टाचार पर गबन की धारा लगवा कर जेल भिजवाने की प्रक्रिया शुरू की जावे जिससे भ्रष्टाचारी सुधर सके
जय हिंद जय भारत
आज के लिए इतना ही भाइयों बहनों ,
अगली मुलाकात फिर एक नई कहानी लेकर आएगी ,नए दस्तावेजों के साथ , नए वीडियो के साथ , नए सबूतों के साथ, पूर्ण पारदर्शिता के साथ ,आपके सामने
” पोल खोल अभियान “
जारी रहेगा । ( आगामी कड़ी में एक विभाग से जुड़े 6 विभाग जो एक ही काम संपन्न करते हैं और टोपी टोपी खेल कर टोपी जनता को पहना रहे हैं और करोड़ों का भ्रष्टाचार निरंतर जारी रखे हुए हैं । उस पर कार्य जारी है , बस थोड़ा इंतजार कीजिए



