
सिवनी मध्यप्रदेश
सिवनी/छपारा जिले के अधिकांश क्षेत्रों में लगातार वर्षा से मक्का और सोयाबीन को नुकसान हो रहा है।खेतों में फसल की वृद्धि रूकने के साथ ही जल भराव के कारण पौधों के जड़े से सड़ने की संभावना बढ़ती जा रही है।कृषि अधिकारियों के मुताबिक, जिले में अभी सामान्य से अधिक वर्षा नहीं हुई है। लेकिन बीते एक पखवाड़े से लगातार वर्षा के कारण खेतों में पानी का जमाव होने के कारण फसलों को नुकसान होने की संभावना बढ़ गई है।ऐसे में किसानों को खेतों से पानी निकासी की उचित व्यवस्था करना चाहिए।
शनिवार को करीब एक पखवाड़े बाद कुछ देर के लिए सूर्यदेव बादलों से बाहर निकले लेकिन दोपहर होते ही मुख्यालय सहित जिले के अधिकांश क्षेत्रों में रिमझिम वर्षा का दौर शुरू हो गया।छपारा क्षेत्र के किसान रामफल चंद्रवंशी, जागेश्वर बंजारा, शिवकुमार बंजारा, रामनाथ, रामकुमार उइके इत्यादि ने बताया कि, बीते साल की तुलना में इस साल लगातार झमाझम वर्षा का दौर जारी है। इससे खेतों में जल प्लावन की स्थिति बनी हुई।क्षेत्र के बहुत बड़े रकबे में लगी मक्का फसल की रौनक गायब हो गई है।बादलों के नहीं छटने और सूर्यदेव के नहीं निकलने के कारण पौधों की वृद्धि रूक गई है।मक्का और सोयाबीन फसल के पौधों के पत्तों में पीलापन आने लगा है।ऐसे में खेत में लगी फसल के सड़ने और रोगग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है।यही स्थिति विकासखंड सिवनी के ग्रामों में देखने को मिल रही है।बरघाट और कुरई क्षेत्र में तो लगातार वर्षा के चलते धान रोपाई का कार्य अटका हुआ है।कुरई क्षेत्र में मक्का फसल प्रभावित होती दिख रही है।
1.50 लाख हेक्टेयर में मक्काः जिले के करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर रकबे में मक्का फसल लगाई गई है।खेतों में मक्का बीज की बुआई किए किसानों को करीब एक माह हो चुका है, लेकिन लगातार वर्षा के कारण कई गांव में मक्का फसल के पौधों की वृद्धि रूक गई है।अंकुरित पौधे की उंचाई रूक सी गई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।वहीं खेत के जिस हिस्से में पानी का भराव हो रहा है वहां तो अंकुरण के बाद पौधों की वृद्धि पूरी तरह थम गई है।किसानों का कहना है कि धूप व हवा नहीं मिलने के कारण फसल खराब होने की कगार पर पहुंच गई है।जिले में खरीफ की मुख्य फसल में मक्का शामिल है।ऐसे में किसानों ने बड़ी मात्रा में खेतों में मक्का लगाया है।वही पठारी क्षेत्र में धान की फसल की तुलना में दलहन-तिलहन की बुआई किसानों ने की है।
धान की रोपाई बाकीः जून माह में जिन किसानों ने मक्का लगा दिया था, वहा फसल में दाना आने लगा है।विलंब से बुआई करने वाले किसानों की उम्मीदों पर लगातार वर्षा पानी फेरने का काम कर रही है।कृषि विशेषज्ञ किसानों को फसल को बचाने खेतों में जमा वर्षा का पानी निकालने की सला दे रहे हैं।इधर, जिले के बरघाट, केवलारी और कुरई में लगातार वर्षा के कारण धान रोपाई का काम रूका हुआ है।करीब 60 हजार हेक्टेयर में धान रोपाई होना बाकी है।
पिछले साल से ज्यादा यूरिया खाद का वितरणः जिले में इस साल यूरिया खाद का वितरण पिछले साल की तुलना में 14090 मैट्रिक टन अधिक हो चुका है।जिले की समितियों व गोदामों में 17135 मैट्रिक टन यूरिया का भंडारण होने के कारण किसानों को यूरिया संकट से जूझना नहीं पड़ रहा है।किसानों को आसानी से यूरिया उपलब्ध हो रहा है।जानकारों के मुताबिक बुआई के बाद फसल में यूरिया व डीएपी का पहला छिड़काव 20 दिन के अंतराल में किया जाता है। इसके बाद 40 दिन के बाद दूसरे छिड़काव की जरूरत होती है।फसलों में पहला छिड़काव किसानों द्वारा किया जा चुका है।ऐसे में फिलहाल किसानों को यूरिया की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही है। जिले में अभी तक 63540 मैट्रिक टन यूरिया खाद का वितरण किया जा चुका है, जो पिछले की साल की तुलना में बहुत ज्यादा है।
इनका कहना है
लगातार वर्षा के कारण मक्का और सोयाबीन फसल की वृद्धि प्रभावित हो रहा है। बादलों के छाए रहने और धूप नहीं खिलने के कारण पौधों की पत्तियों में पीलापन आने की शिकायत मिल रही है।वर्षा से फसलों को बचाने के लिए किसानों को खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी जा रही है।जिले में यूरिया खाद का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है, कहीं भी यूरिया खाद की कमी नहीं है।
मोरिश नाथ, उपसंचालक
कृषि कल्याण विभाग सिवनी।




