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चोर पकड़ा, बैटरी मिली, फिर भी पीड़ित खाली हाथ; जबलपुर के शहपुरा थाने का गजब कारनामा!

Posted on

September 1, 2026

by india Khabar 24


जबलपुर (गजेन्द्र सेंगर): न्याय की उम्मीद में जब कोई आम आदमी पुलिस के पास जाता है, तो उसे सुरक्षा और निष्पक्षता का अहसास होना चाहिए। लेकिन जबलपुर जिले का शहपुरा थाना इन दिनों अपनी एक ‘अनोखी’ और विवादित कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। यहाँ एक ऐसा अजीबो-गरीब मामला सामने आया है जहाँ पुलिस की मुस्तैदी पीड़ित की मदद करने के बजाय, कथित तौर पर चोरों को ‘संरक्षण’ देने या मामले को दबाने में दिखाई दी।

🚨 क्या है पूरा मामला?
खबरों के अनुसार, क्षेत्र में एक पीड़ित की कीमती बैटरी चोरी हो गई थी। पीड़ित और स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए न सिर्फ संदिग्ध चोर को रंगे हाथों दबोचा, बल्कि उसके पास से चोरी की गई बैटरी भी बरामद कर ली। इसके बाद आरोपी और बरामद माल (बैटरी) दोनों को शहपुरा पुलिस के हवाले कर दिया गया।
आम तौर पर ऐसी स्थिति में पुलिस तुरंत एफआईआर दर्ज करती है और आरोपी को सलाखों के पीछे भेजती है। लेकिन शहपुरा थाने में कहानी उलट गई।
🤨 चोर को छोड़ा, पीड़ित रह गया खाली हाथ
आरोप है कि शहपुरा पुलिस ने इस मामले में कोई कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के बजाय चोर को थाने से आसानी से छोड़ दिया। हद तो तब हो गई जब सबूत के तौर पर मौजूद बैटरी भी पीड़ित को वापस नहीं सौंपी गई। चोर के छूट जाने और अपनी ही बरामद संपत्ति न मिलने से परेशान पीड़ित पुलिस थाने के चक्कर काटने को मजबूर हो गया।
📱 सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और खबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही है। स्थानीय जनता पुलिस की इस कार्यशैली पर तीखे सवाल उठा रही है। लोगों का सीधा आरोप है कि पुलिस और चोरों के बीच कोई अंदरूनी सांठगांठ या आपसी ‘लेन-देन’ हुआ है, जिसके चलते मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया।
किस आधार पर और किसके आदेश से पकड़े गए आरोपी को बिना ठोस कार्रवाई के छोड़ा गया?

  स्थानीय पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने थाना प्रभारी (TI) या बीट प्रभारी के स्तर पर ही मामले को रफा-दफा करने की नीयत से आरोपी को छोड़ दिया। कानूनी रूप से जब जनता किसी चोर को रंगे हाथों पकड़कर पुलिस को सौंपती है, तो पुलिस को तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर उसे गिरफ्तार करना होता है।

बरामद की गई बैटरी पीड़ित को तुरंत क्यों नहीं लौटाई गई?

इस मामले में पीड़ित का आरोप है कि पुलिस जानबूझकर मामला टाल रही थी। चूंकि पुलिस ने चोर पर ठोस कार्रवाई नहीं की और न ही उचित तरीके से जब्ती दिखाई, इसलिए वे बैटरी को भी रिकॉर्ड पर लेने या पीड़ित को सौंपने में आनाकानी कर रहे थे, ताकि मामले का कोई पुख्ता सबूत ही न बचे।

शहपुरा थाने में 8 साल से जमे पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी क्या ?

मध्य प्रदेश पुलिस और सामान्य प्रशासन के नियमों के अनुसार, किसी भी पुलिसकर्मी (आरक्षक, प्रधान आरक्षक या एसआई) को एक ही थाने में अधिकतम 3 से 4 साल से ज्यादा नहीं रखा जा सकता। अगर कोई पुलिसकर्मी 8 साल से एक ही थाने में जमा हुआ है, तो यह प्रशासनिक नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस विवाद के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में यह बात आई है। ऐसे मामलों में जब कोई बड़ा घोटाला या लापरवाही उजागर होती है, तो वरिष्ठ अधिकारी (जैसे IG या SP) लंबे समय से जमे पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर (Line Attach) करते हैं या उनका प्रशासनिक तबादला (Transfer) कर देते हैं। इस जांच के दायरे में वे सभी पुराने स्टाफ आ सकते हैं जिनकी शहपुरा क्षेत्र के संदिग्ध तत्वों से सांठगांठ है

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September 1, 2026

by india Khabar 24

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