पूजा ज्योतिषी मण्डला
सही उम्र में शादी ना होना, समाज में बढ़ रहे एकल परिवार और सिर्फ एक बच्चे की चाह रखना अब बहुत सारी समस्याओं को जन्म दे रहा। इस बारे में विगत वर्षों में कई बुद्धिजीवियों ने इस विषय पर अपने विचार लिखे। इन मुद्दों पर चर्चा कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया । विगत 9 अप्रैल 2023 रविवार को मंडला में आयोजित परिचय सम्मेलन में विशिष्ठ अतिथि के रूप में महाकाल की नगरी उज्जैन से पधारे आदरणीय बाबू सिंह कुशवाहा जी ने मंच से अपने उद्बोधन में भी इस बारे। में कहा था -अपने समाज में 30 वर्ष की आयु तक बच्चे बच्चियों के विवाह संपन्न हो ही जाएं । अब आप हम सबको प्रयास करने की जरूरत है । किंतु, खासतौर से अभी तक जिन बच्चियों का विवाह 30 वर्ष से ज्यादा आयु हो जाने के बाद भी नहीं हो पाया । अब समाज के आप हम सब लोगों को व्यक्तिगत रुचि लेकर इस दिशा में काम करने की जरूरत है। व्यक्तिगत संकल्प लें कि हर वर्ष कम से कम 30 वर्ष से अधिक आयु अविवाहित बच्चियों का विवाह संस्कार हो सके। उसका घर बस जाए । मिलकर प्रयास करें। एकल परिवार और एक बच्चे की चाह रखने वाले युवा दंपत्ति से कहना चाहूंगा कि, वर्तमान में ढेर सारी समस्याओं के समाधान के लिए, हिंदू राष्ट्र निर्माण, सशक्त और संस्कारित भरा पूरा परिवार के लिए एक बच्चे की चाह और एकल परिवार बाधक सिद्ध हो रहा है। ऐसा लगता है आने वाली पीढ़ी बहुत से रिश्तों के स्नेह, मिठास, महत्व से वंचित रह जायेगी। मुझे बहुत अच्छे से याद है 15 वर्ष पहले हम सब चाचा, मामा, मौसी, बुआ, बड़ी अम्मा आदि सबके बच्चे हर साल रक्षा बंधन त्योहार मिलकर मनाते थे उस समय मुझे कुल 43 बहने राखियां बंधती थी । और सब लोगों की नजर मेरे हाथों में रहती थी। सुबह, दोपहर, शाम का खाना अलग अलग घरों में अलग अलग मेन्यू के हिसाब से तैयार होता था । हर सामाजिक धार्मिक त्यौहार में अपने खास रिश्तेदारों की संख्या इतनी ज्यादा होती थी । कि, हर त्योहार का आनंद दोगुना हो जाता था । किंतु, वो मीठी यादें अब सिर्फ स्मृति पटल पर ही शेष हैं। अब तो सोशल मीडिया पर लाइक, शेयर, कमेंट्स के आडंबर वाली दुनिया है। सच्चाई और हकीकत में बहुत अंतर होता है। रिश्तेदारों और रिश्तों की संख्या और सम्मान , अपनत्व और समर्पण में भी कमी महसूस हो रही है।
विवाह का 30 वर्ष की आयु तक हो जाना बहुत जरूरी है। यदि, हम ये सोचते हैं कि, 17 वर्ष की आयु तक बारहवीं तक की शिक्षा के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन या पांच साल का कोई डिप्लोमा डिग्री का कोर्स 22 वर्ष की आयु में भी करता है। और इसके बाद जॉब प्लेसमेंट या कोई व्यवसाय भी 3 या 4 वर्ष करता है। तब भी 30 की आयु के पूर्व विवाह आसानी से किया जा सकता है । मेरा व्यक्तिगत विचार और निवेदन है। लड़कियों की शादी 25- 26 और लड़कों की शादी 28- 30 वर्ष की आयु तक हो ही जाना चाहिए। जिससे गृहस्थ आश्रम की जिम्मेदारी, उसका सुख, स्वयं की संतानों का विवाह भी रिटायरमेंट के आस पास संपन्न किए जा सकते हैं। जो हर अभिभावक चाहता है। किंतु, दुख की बात है आज की युवा पीढ़ी अपने केरियर और अन्य वजह से विवाह सही समय पर करने का निर्णय नहीं लेती और अब तो अपने अभिभावक को भी मजबूर करती हैं। जिसके दुष्परिणाम बाद में उनको खुद को और उनके परिवार और उनके पेरेंट्स को भी देखने को मिलते हैं। मेरा व्यक्तिगत विचार और आवाहन है । समाज के सभी स्वजातीय बंधु अपने आस पास, अपनी रिश्तेदारी में इस दिशा में भागीरथी प्रयास कर समाज को एक नई दिशा दें। अपनी हर सामाजिक बैठकों और परिवार में विवाह योग्य बच्चों के विवाह किसी भी हाल में 30 की उम्र के पूर्व हो सके इसके लिए दो साल पूर्व ही रिश्ते खोजने का प्रयास की आवश्यकता है । क्योंकि सही उम्र के साथ साथ सही रिश्ता भी सुखद दांपत्य जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। शारीरिक बीमारी, आर्थिक स्थिति, नौकरी व्यवसाय शिक्षा आदि के बारे में दस्तावेजों साथ ठोस जानकारी विवाह के लिए आवश्यक है। इस पर खुली चर्चा की जानी चाहिए। अपने परिवार में जब बच्चे बारहवीं की शिक्षा उत्तीर्ण कर ले मतदान करने की आयु पार कर लें तभी से इन सब विषयों पर स्पष्ट चर्चा सामूहिक चर्चा हर परिवार में किया जाना चाहिए जिससे आने वाले समय और आयु के अनुसार जिम्मेदारी का महत्व का एहसास बच्चों को भी हो अपने जीवन की आयु के अनुसार जिम्मेदारी का महत्व समझ सकें। विगत दिवस धर्मांतरण की सच्चाई परोसती फिल्म द केरला स्टोरी में भी इस बात का जिक्र है कि, बच्चों को उनके अभिभावक अपने संस्कार, धर्म के बारे में क्यों नहीं बताया या समझाया। इस आयु(20 से 30) में बढ़ रहे नशे और अनैतिक संबंध, अस्त व्यस्त दैनिक चर्या का परिणाम भी कुछ हद तक अंकुश लगाने में सही उम्र में विवाह किए जाने से सकारात्मक योगदान हो सकता है। सभी युवाओं को या अनके अभिभावकों को ये चर्चा की जानी चाहिए नशा की लत और गंदा साहित्य, अश्लील फिल्में प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर करती है जिसका परिणाम स्वरूप युवा दंपत्ति संतान सुख से वंचित रह जाते हैं । इसलिए अपनी मौज मस्ती आपके जीवन में क्या क्या दुष्परिणाम ला सकती है। सबको जागरूक रहने की जरूरत है। इसलिए कहा भी जाता है जवानी में सतर्क और समझदारी की बहुत आवश्यकता होती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी हमारे शरीर में स्त्रावित होने वाले हार्मोन, स्वस्थ्य संतानोत्पत्ति,शारीरिक और मानसिक स्वस्थ रहने के लिए विवाह सही उम्र में किया जाना जरूरी है। हमारे धार्मिक ग्रंथों में भी गृहस्थ आश्रम के साथ अन्य आश्रमों और उनके महत्व के लिए भी तय समय आयु के निर्धारण की चर्चा की गई है।
आप सभी से इस लेख के माध्यम समाज हित के लिए इस दिशा में ध्यान आकर्षित कर प्रयास किए जाने का विनम्र निवेदन है। सादर धन्यवाद।
लेख –
रंजीत कछवाहा
अध्यक्ष श्रीराम मंदिर ट्रस्ट
कछवाहा समाज मंडला मध्य प्रदेश


