
बालाघाट/ लालबर्रा।
लालबर्रा में कहां से पहुंचती है गांजे की खेप… विक्रेता पुलिस की पकड़ से दूर
न जाने कितने महीने व कितने सालों से लालबर्रा में जगह जगह मादक पदार्थ गांजा बेचा जा रहा है, परंतु ऐसी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में पुलिस प्रशासन व आबकारी विभाग बौना साबित हो रहा है ,या यूं कहें कि चुपचाप बैठा हुआ है ,मिली जानकारी के अनुसार कार्रवाई के अभाव में अवैध व्यापार करने वालों के हौसले बुलंदी पर है ,आखिर क्या कारण है कि इन काले कारोबारियों पर पुलिस के द्वारा शिकंजा नहीं कसा जा रहा है। देश में मादक पदार्थ गांजे की बिक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद भी आखिर लालबर्रा में गांजा पहुंच कैसे रहा है, कौन है गांजे का तस्कर जिसे पुलिस और आबकारी विभाग आज तक पता नहीं लगा पाई जो कानून व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है। जिससे गांजे के विक्रेता बेखौफ होकर बिक्री करने में लगे हुए है, क्या गांजे के विक्रेताओं की पुलिस को और आबकारी विभाग को खबर नहीं है, जब आम आदमी को जगह-जगह बिक रहे गांजे की जानकारी है, तो फिर पुलिस और आबकारी विभाग को क्यों नहीं…? कहते हैं पुलिस के हाथ बहुत लंबे होते हैं, और हर अपराधी पुलिस के नाम से ही कांप जाता है, गड़े मुर्दे खुद जाते हैं, परंतु क्षेत्र में अवैध गतिविधियों का बोलबाला देखा जा रहा है, पर पता नहीं पुलिस इन अवैध गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों पर कार्रवाई करने से क्यों बच रही है क्या पुलिस का मुखबिर तंत्र निष्क्रिय हो गया है जो क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर नजर नहीं रख सकता या फिर मुखबिरी करना ही नहीं चाहता अगर ऐसा ही चलता रहा तो 1 दिन ऐसा आएगा की क्षेत्र के अनेकों युवा मजदूर और किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे। कुछ दिन पूर्व में समाचार पत्रों में गांजे की बिक्री के संबंध में खबरों का प्रकाशन किया गया था जिम्मेदार आबकारी व पुलिस विभाग को समाचार के माध्यम से अवगत कराए जाने के बाद भी पुलिस और आबकारी विभाग इन अवैध कारोबारियों पर शिकंजा कसने में नाकाम ही साबित हो रहा है सवाल यह उठता है कि पुलिस विक्रेताओं के यहां छापामार कार्रवाई क्यों नहीं करती जब आम जन को गांजे की बिक्री के बारे में पता है तो फिर जिम्मेदारों को क्यों नहीं पता..जो कानून व्यवस्था की पोल खोलते हैं।
कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल-
आबकारी और पुलिस का काम मादक पदार्थों की अवैध बिक्री पर लगाम लगाना है और अपराधों को रोकना है अपराधियों का पता लगाना है कि कहां आपराधिक गतिविधिया हो रही है लेकिन लालबर्रा पुलिस अपराधिक गतिविधियों को जानने में विफल साबित हो रही है, जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।
आबकारी विभाग क्यों नहीं कर रहा कार्रवाई-
सवाल यह है की एक तरफ प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान अवैध कार्यों में लिप्त माफियाओ पर कार्रवाई की बात हमेशा करते रहते हैं और अपराधी को जमीन में जिंदा गाड़ने की बात करते हैं। परंतु जिम्मेदार आबकारी एवं पुलिस अधिकारी सरकारी फरमान को तवज्जो नहीं दे रहे है। आपराधिक गतिविधियों को क्यों नहीं रोक पा रहे है ।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लालबर्रा में प्रतिबंधित गांजे की बिक्री जगह-जगह जैसे मानपुर स्थित पेट्रोल पंप के पास, हॉस्पिटल रोड पर, अमोली मार्ग पर, गुजरी के अंदर, गड्ढा मोहल्ला में दो स्थानों पर एवं क्षेत्र के अनेकों ग्रामों में खुलेआम प्रतिबंधित गांजा बेचा जा रहा है । विक्रेताओं के आसपास के रहवासियों ने मीडिया से दबी जुबान गांजे की बिक्री के संबंध में जानकारी दी और समाचार पत्रों में समाचार के माध्यम से जिला प्रशासन से कार्रवाई की गुहार लगाई है, ताकि प्रशासन जागे और कार्यवाही करें ,प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं होने के चलते गांजे की बिक्री खुलेआम और जोरों पर है। लालबर्रा थाने में आयोजित शांति समिति की बैठक में कंजई सरपंच एडवोकेट आनंद बिसेन ने भी लालबर्रा पुलिस को अवैध गांजे और कच्ची शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने को कहा था। लालबर्रा में खुलेआम गांजे की अवैध बिक्री के संबंध में जब जिला आबकारी अधिकारी सुरेंद्र कुमार उराव से चर्चा करनी चाही गई तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
इनका कहना है
अगर ऐसा चल रहा है, तो मैं तत्काल कार्रवाई करवाता हूं।
समीर सौरभ
पुलिस अधीक्षक बालाघाट।


