जिले में पटवारी सहायकों के सब्र का बाँध अब टूट चुका है। एक साल से वेतन न मिलने और सुरक्षा के नाम पर शून्य इंतजामों से त्रस्त पटवारी सहायक आज कलेक्ट्रेट पहुँचे और अपना दुखड़ा रोया। उन्होंने बताया कि कैसे वे अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी सुध नहीं ले रहा।
पटवारी सहायकों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि जब वे खेतों में फसलों का सर्वे करने जाते हैं, तो उन्हें किसानों द्वारा गलत सर्वे करने के लिए दबाव डाला जाता है। उन्हें ‘जीरो लोकेशन’ पर जाकर सर्वे करना पड़ता है। ये ‘जीरो लोकेशन’ अक्सर ऐसी जगहों पर होती हैं जहाँ पहुँचना असंभव होता है – कभी घुटनों तक पानी भरा होता है, तो कभी वहाँ तक जाने का कोई रास्ता ही नहीं होता। ऐसी स्थिति में सर्वे करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता।
छत्रपाल सिंह, एक पटवारी सहायक, ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि गिरदावरी सर्वे के दौरान उन्हें एक बार बिच्छू ने काट लिया था। उनका कहना है कि प्रशासन की तरफ से उन्हें न तो कोई बीमा मिलता है और न ही कोई सुरक्षा किट। बिच्छू के अलावा उन्हें कुत्ते के काटने जैसी घटनाओं का भी सामना करना पड़ा है। कई बार तो सर्वे के दौरान किसानों के साथ तीखी बहस और विवाद तक की स्थिति बन जाती है।
पटवारी सहायकों का आरोप है कि वे अपनी इन गंभीर समस्याओं को लेकर शाहपुरा तहसील में तीन बार और एसडीएम को दो बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए, उनका बकाया वेतन तुरंत जारी किया जाए और उन्हें काम के दौरान आवश्यक सुरक्षा मुहैया कराई जाए। आखिर कब तक ये सहायक अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते रहेंगे, जबकि उन्हें न तो सही वेतन मिल रहा है और न ही सुरक्षा।





