4 कंधे नहीं हो रहे नसीब, ट्रैक्टर पर ले जाना पड़ रहा शव
छपारा नगर परिषद के हनुमान वार्ड छपारा कला का मामला
सिवनी ईश्वर दीक्षित
सिवनी/छपारा – नगर परिषद में विकास की गंगा ऐसी बह रही है कि मोक्ष धाम में अंतिम संस्कार के लिए चार कंधों की बजाए शव को ट्रैक्टर पर ले जाना पड़ रहा हैं। जी हां दरअसल नगर परिषद के हनुमान वार्ड छपारा कला मोक्ष धाम घाट पर आने जाने वाला रास्ता कीचड़ और दलदल से इतना खराब हो चुका है कि चलना भी मुश्किल हैं जिसके कारण अंतिम संस्कार के लिए शव को ट्रैक्टर पर ले जाने के लिए लोग मजबूर हो रहे हैं।
## भारी भरकम वाहनों के कारण हुई दुर्दशा ##
बता दें कि छपारा नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 14 में मोक्ष धाम मार्ग में एक कदम चलना भी मुश्किल हो गया है हर कदम में कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढे हैं जिससे लोग यहां पैदल भी नहीं चल पा रहे हैं यह मार्ग बैनगंगा नदी तट छपारा नगर परिषद के हनुमान वार्ड के मोक्ष धाम में जाकर मिलता है इसी मार्ग पर करोड़ों की लागत से जनजातीय विभाग द्वारा कन्या परिषद की बिल्डिंग बनाई जा रही है जिसके भारी भरकम वाहन इसी रास्ते से गुजरते हैं जिस वजह से यह मोक्ष धाम मार्ग बुरी तरह बदहाल हो गया हैं। दो दिनों पूर्व नगर परिषद के छपारा कला निवासी ठाकुर परिवार में एक व्यक्ति का देहांत हो गया तब यहां से लोगों को बड़ी कठिनाइयों के साथ शव लेकर मोक्ष धाम जाना पड़ा जिसको लेकर लोगों में नाराजगी और गुस्सा भी हैं।
## विधायक रजनीश ने दिखाई नाराजगी ##
वही इस अंतिम संस्कार यात्रा में शामिल हुए केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश सिंह ने भी इस बदहल सड़क की सूरत देख जमकर नाराजगी जाहिर की और उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों को कुर्सी से उतरकर जाकर देखने की फुर्सत नहीं हैं। जिसके चलते इस तरह के हाल यहां बने हुए हैं। उन्होंने इस पर जमकर नाराजगी जाहिर करते हुए जिम्मेदारों को तुरंत संज्ञान लेकर सड़क का सुधार किए जाने के लिए कहा हैं।
## कमिश्नर और कलेक्टर का असंवेदनशील रवैया, मोक्ष धाम की दिखाई नहीं दी डगर ##
बता दें कि इसी मोक्ष धाम के समीप जनजातिय विभाग के द्वारा बनाए जा रहे करोड़ों की लागत से कन्या परिषद का आकस्मिक निरीक्षण करने जबलपुर कमिश्नर और जिला कलेक्टर भी पहुंची थी। इन अधिकारियों के वाहन भी किसी तरह उक्त भवन तक बमुश्किल पहुंच पाए थे। इस दौरान मीडिया कर्मियों ने इस मोक्ष धाम के आने-जाने वाले रास्ते की दुर्दश को लेकर सवाल जवाब भी किए थे। लेकिन इन बड़ेअधिकारियों की असंवेदनशीलता के चलते हालात जस की तस है। आज भी मोक्षधाम में दर्जनों गांव के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए ट्रैक्टर पर ही शव ले जाने को मजबूर होना पड़ रहा हैं।





