जबलपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर जबलपुर के नारे नाल पहुंचे। यह वही जगह है, जहां आसिफ खान ने गोंडवाना की महारानी रानी दुर्गावती को 462 साल पहले धोखे से मार दिया था। वीरांगना रानी दुर्गावती का आज (24 जून) को 462वां बलिदान दिवस है।
इस दौरान डॉ.मोहन यादव ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में 33% आरक्षण की तैयारी चल रही है। भारतीय जनता पार्टी हमेशा ही महिलाओं के सम्मान में आगे रहेगी। रानी दुर्गावती योजना, जिसके जरिए आदिवासियों के अनाज मिलेट्स को हम ₹4000 प्रति क्विंटल तक का अनुदान दे रहे हैं।
रानी दुर्गावती का इतिहास स्कूली बच्चों को पढ़ाया जाएगा
हम पाठ्यक्रम में रानी दुर्गावती के इतिहास को जोड़ रहे हैं ताकि भविष्य रानी दुर्गावती जैसी महारानियों का इतिहास जानती रहेगी। रानी दुर्गावती का इतिहास स्कूली बच्चों को भी पढ़ाया जाएगा। रानी दुर्गावती ने 52 लड़ाई लड़ी थी। जिनमें से 51 जीते, 23000 से ज्यादा गांव पर उन्होंने सफलतापूर्वक राज किया।
डॉ मोहन यादव ने कहा कि इसके पहले हमने चंद्रशेखर आजाद की कहानी सुनी थी, जिन्होंने यह कहा था कि आजाद जिए हैं, आजाद ही मारेंगे। मुझे ऐसा लगता है कि चंद्रशेखर आजाद ने रानी दुर्गावती से ही यह प्रेरणा ली होगी। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती के सेनापति आधार सिंह को भी याद किया। उन्होंने कहा कि आधार सिंह ने इस क्षेत्र के जल प्रबंधन के लिए बड़ा काम किया है।
रानी दुर्गावती के नाम पर जबलपुर में खुलेगा चिड़ियाघर
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रानी दुर्गावती के नाम पर जबलपुर में एक चिड़ियाघर खोलने की घोषणा की है। यह स्थान केवल चिड़ियाघर नहीं होगा बल्कि यह एक रेस्क्यू सेंटर होगा। जहां लाए गए जानवरों को भी रखा जा सकेगा। यह चिड़ियाघर ठाकुर लाल के पास खोला जाएगा।
सीएम ने कहा कि जबलपुर नगर निगम रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर जो मैराथन दौड़ का आयोजन करवाता है। उसे मैराथन दौड़ के स्टैंडर्ड पर लाना चाहिए। इस मौके पर मोहन यादव ने₹500000 की राशि दी है। कार्यक्रम के दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे सहित अन्य विधायक, नेता भी मौजूद रहे।
गांव बरहा के पास है वह जगह, जहां रानी को वीरगति मिली
जबलपुर-बरगी रोड पर स्थित ग्राम बरहा के पास वह स्थान है, जहां रानी दुर्गावती वीरगति को प्राप्त हुई थीं। इसी स्थान पर नरई नाला के समीप उनका समाधि स्थल स्थित है। रानी दुर्गावती के बलिदान और वीरता को आज भी श्रद्धा से याद किया जाता है। उनके सम्मान में भारत सरकार ने 24 जून 1988 को डाक टिकट जारी किया था। रानी ने 16 सालों तक शासन किया और इस दौरान अनेक मंदिर, मठ, कुएं, बावड़ी और धर्मशालाओं का निर्माण करवाया।
बताया जाता है कि रानी दुर्गावती ने तीन मुस्लिम राज्यों को बार-बार युद्ध में पराजित किया था। वे इतने भयभीत हो गए थे कि उन्होंने गोंडवाना की ओर देखना तक बंद कर दिया था। इन युद्धों में उन्हें अपार संपत्ति भी प्राप्त हुई थी।





