नागनदेवरी (सिवनी, म.प्र.) रिपोर्टर ईश्वर दीक्षित
जिला सिवनी की ग्राम पंचायत नागनदेवरी में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें अब धीरे-धीरे खुलती जा रही हैं। पंचायत के भीतर चल रहे क्रय-विक्रय, निर्माण कार्यों, भंडारा, सांस्कृतिक आयोजन और दैनिक खर्चों में भारी वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि इन अनियमित खर्चों और फर्जी बिलों पर ग्राम पंचायत की नियमित प्रक्रिया के बजाय उपसरपंच और सत्तारूढ़ दल के भाजपा मंडल अध्यक्ष की सील और साइंस लगाकर भुगतान पास किया जा रहा है।
पंचायत सचिव, सरपंच को किया गया दरकिनार
पंचायती व्यवस्था के तहत किसी भी आर्थिक कार्यवाही के लिए सरपंच, सचिव और ग्राम सभा की भूमिका आवश्यक होती है। मगर नागनदेवरी पंचायत में इन सभी नियमों को दरकिनार कर भाजपा मंडल अध्यक्ष और उपसरपंच मिलकर लाखों रुपये के बिलों को वैध रूप दे रहे हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि पंचायत के आर्थिक मामलों में राजनीतिक दखल चरम पर है।
भाजपा मंडल अध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध
स्थानीय नागरिकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि सत्ताधारी पार्टी के मंडल अध्यक्ष, जिनका पंचायत के प्रशासनिक कार्यों से कोई संवैधानिक संबंध नहीं है, वे सीधे तौर पर बिलों पर हस्ताक्षर कर भुगतान करवाने में संलिप्त हैं। यह न केवल प्रशासनिक अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि सीधा-सीधा राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग भी है।
ग्रामवासियों का कहना है कि वर्तमान सरपंच को किनारे कर उपसरपंच ने पंचायत के सभी कार्यों की कमान अपने हाथ में ले ली है। बिना किसी बैठक, प्रस्ताव या ग्रामसभा की स्वीकृति के सीधे खरीद और भुगतान किए जा रहे हैं।
जनता ने जताई नाराजगी, जांच की मांग
ग्रामवासियों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है। कई लोगों ने जिला कलेक्टर और जनपद सीईओ को को जांच हेतु अपील की है
पंचायत के पिछले दो वर्षों के सभी भुगतान की विशेष लेखा-परीक्षा हो
भाजपा मंडल अध्यक्ष उपसरपंच की संलिप्तता की स्वतंत्र जांच कराई जाए
जिन फर्जी बिलों पर भुगतान हुआ है, उनकी वास्तविकता की जमीनी स्तर पर जांच हो

सील और साइंस के दुरुपयोग पर एफआईआर दर्ज हो
भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिशें
सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि जब इस मामले की भनक ऊपर तक पहुंचने लगी, तो पंचायत में मौजूद भ्रष्ट समूह ने कुछ दस्तावेजों को गायब करने और पुराने रिकॉर्डों में हेरफेर करने की भी कोशिश की। अगर समय रहते जांच नहीं हुई, तो साक्ष्य नष्ट किए जा सकते हैं।
निष्कर्ष:ग्राम पंचायत नागनदेवरी का यह मामला पंचायत स्तर पर व्याप्त राजनीतिक भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण है। जिस प्रणाली को गांवों के विकास और पारदर्शिता के लिए बनाया गया था, आज उसी प्रणाली को कुछ स्वार्थी जनप्रतिनिधि और राजनीतिक पदाधिकारी मिलकर खोखला कर रहे हैं। यदि उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला पूरे जिले की पंचायत व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा देगा.





