4 साल में बाबू ने गबन किए 7 करोड़ संदीप ने ऑफिस के ग्रुप से लेफ्ट होने से पहले लिखा, “बहुत ज्यादा ग्लानि हो रही लगता है कि आत्महत्या के अलावा कोई चारा नहीं

Posted on

March 15, 2025

by india Khabar 24

 

(पिता की मौत के बाद हुई थी अनुकंपा नियुक्ति; 40 हजार की जगह निकालता रहा 4 लाख वेतन)

जबलपुर वित्त विभाग के स्थानीय निधि संपरीक्षा कार्यालय में पदस्थ एक बाबू ने अधिकारियों की नाक के नीचे करोड़ों रुपए का घोटाला कर दिया। यह घोटाला लगभग चार वर्षों तक चलता रहा, लेकिन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। आखिरकार, फरवरी 2025 में तैयार हुई ऑडिट रिपोर्ट में यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।
जैसे ही गबन की खबर फैली, घोटालेबाज बाबू फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। मामला सामने आने के बाद, कमिश्नर अभय वर्मा ने संपरीक्षा विभाग की सहायक संचालक प्रिया विश्नोई तो वहीं कलेक्टर दीपक सक्सेना ने ज्येष्ठ संपरीक्षक सीमा अमित तिवारी को निलंबित कर दिया।
संयुक्त संचालक के फर्जी हस्ताक्षर कर, फर्जी आदेशों और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए करीब 7 करोड़ रुपए का गबन करने वाला बाबू संदीप शर्मा अब भी फरार है। संचालनालय स्थानीय निधि संपरीक्षा प्रकोष्ठ भोपाल ने उसे निलंबित कर दिया है। इसी बीच, कलेक्टर के निर्देश पर ओमती पुलिस ने संपरीक्षा विभाग के संयुक्त संचालक समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

अब जानिए कैसे किया करोड़ों का घोटाला

जबलपुर के सिविक सेंटर स्थित स्थानीय निधि संपरीक्षा कार्यालय में संदीप शर्मा, सहायक ग्रेड-3 में बाबू के पद पर पदस्थ है। नियमानुसार उसकी सैलरी 44 हजार रुपए थी। लेकिन एक साल पहले फरवरी 2024 में उसने सैलरी बिल के पीपी कॉलम में राशि बढ़ाकर चार लाख रुपए कर दी। इसके बाद बाबू संदीप शर्मा ने एक साल तक 44 हजार रुपए के स्थान पर 4 लाख 40 हजार रुपए प्रतिमाह (फरवरी 2024 से जनवरी 2025 तक) वेतन के रूप में 53 लाख 55 हजार रुपए निकाल लिए। लेकिन उसके द्वारा किए गए इस गबन की को भनक किसी अधिकारी को नहीं लगी।

पुलिस जांच में सामने आया कि सहायक संचालक प्रिया विश्नोई और ज्येष्ठ संपरीक्षक सीमा अमित तिवारी ने बाबू संदीप को अपनी ईडी का लॉगिन पासवर्ड दे रखा था। जिसके चलते ही उसने इस घोटाले को अंजाम दिया। पुलिस करोड़ों के इस फर्जीवाड़े में संयुक्त संचालक की भी भूमिका संदिग्ध मान रही है।

फर्जी बिल लगाकर निकाले 7 करोड़

फरार बाबू संदीप शर्मा ने सैलरी के अलावा विभागों में पास होने आए बिलों में हेरफेर कर करोड़ों रुपए का गबन किया। दरअसल संयुक्त संचालक ऑडिट जबलपुर संभाग के ऑफिस में नगरीय निकाय सहित कार्यालय में होने वाले काम के बिल पास किए जाते है। इसी विभाग में पदस्थ बाबू संदीप शर्मा ने बड़ी ही चालाकी से ना सिर्फ बीते एक साल में हर माह 4 लाख 40 हजार रुपए निकालता रहा, बल्कि फर्जी बिल लगाकर करीब 7 करोड़ रुपए तक निकल लिए। फर्जी बिल लगाकर अपने परिचितों के खातों में पैसे ट्रांस्फर करने का यह काम संदीप 2012 से कर रहा था।

घोटाला उजागर होने के बाद से फरार

25 फरवरी 2025 को विभाग में करोड़ों का गबन होने की बात सामने आते ही हड़कंप मच गया। आनन-फानन में संयुक्त संचालक ने जिला कोषालय अधिकारी को घोटाले की जानकारी देते हुए ओमती थाने में शिकायत दर्ज करवाई। लेकिन इसकी भनक घोटालेबाज बाबू संदीप शर्मा को लग चुकी थी। वह पुलिस की कार्रवाई से पहले ही फरार हो गया।

इधर, संपरीक्षा कार्यालय में पदस्थ सहायक संचालक प्रिया विश्नोई और ज्येष्ठ संपरीक्षक सीमा अमित तिवारी सहित बाबू संदीप शर्मा को निलंबित करने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर गुरुवार 13 मार्च को संयुक्त संचालक मनोज बरहैया सहित संदीप शर्मा, सीमा अमित तिवारी, प्रिया विश्नोई और अनूप कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

जांच में पता चला है कि प्रिया विश्नोई और सीमा अमित तिवारी ने बाबू संदीप को लॉगिन पासवर्ड दे रखा था। जिसके चलते ही उसने इस घोटाले को अंजाम दिया था। करोड़ों के फर्जीवाड़े में संयुक्त संचालक की भूमिका भी संदिग्ध रही है।

जानकारी के मुताबिक संदीप ने ऑफिस के ग्रुप से लेफ्ट होने से पहले लिखा, “बहुत ज्यादा ग्लानि हो रही है। लगता है कि आत्महत्या के अलावा कोई चारा नहीं है।” संदीप के इस मैसेज के बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी है।

कलेक्टर के निर्देश पर मामला दर्ज हुआ

लाखों रुपए का घोटाला सामने आने के बाद संयुक्त संचालक संपरीक्षा कार्यालय मनोज बरैया जिला कोषालय अधिकारी विनायिका लकरा से मुलाकात कर उन्हें मामले से अवगत करवाया। इसके बाद घोटाले की जानकारी कलेक्टर दीपक सक्सेना को दी गई। जिसके बाद बाबू संदीप शर्मा सहित तीन अधिकारियों के निलंबन की कार्रवाई हुई। इधर जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 2021 से 2025 फरवरी तक संदीप शर्मा ने 6.99 करोड़ का घोटाला किया था।

विभाग के 3 दर्जन से अधिक कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध

कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच टीम ने यह भी पाया कि 2021 से ही संदीप शर्मा के साथ वेरिफायर सीमा अमित तिवारी, अप्रूवर मनोज बरहैया एवं पेरोल अप्रूवर प्रिया विश्नोई की मिलीभगत थी। घोटाले की जांच कर रही टीम ने अनिकेत विश्वकर्मा, प्रतीक शर्मा, पुनीता, प्रियांशु शर्मा, शैरोन अर्पित हैरिसन, शालोम विवियन गिल, आशीष विश्वकर्मा, मोहम्मद रयाज, राहुल शर्मा, कविता शर्मा, स्वाति शर्मा, दिलीप कुमार विश्वकर्मा, रुकसार परवीन, शिवम शर्मा, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद शरीक, मो. उबेदुल्ला, पुष्पा देवी शर्मा, शुभम शर्मा, विनय कुमार, काशिफ आजमी, अनीशा शर्मा, दत्ताराय सरवन, पूनम शर्मा, केके शर्मा, श्वेता शर्मा, कृतिका विश्वा, विकास कुमार, अनीता, आकांक्षा, सुष्मिता सरवन, अनिल कुमार मिश्रा, अनिल कुमार मरावी, जया पासी और मेनुका भी इसमें संलिप्त हो सकते है। लिहाजा इसकी जांच अभी जारी है।

अधिकारियों ने संदीप शर्मा को लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिया जिसके चलते शासन को हुआ करोड़ों का नुकसान…अपर कलेक्टर

अपर कलेक्टर मिशा सिंह ने बताया कि जो भी बिल बनाकर पास किए गए है, उसकी तीन स्टेज थी। पहली स्टेज पर बाबू संदीप शर्मा की जो कि बिल बनाया करता था, इसके बाद बिल को वेरिफाई करने और अंतिम स्टेज पर उसे अप्रूव करने की दो अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी होती थी। जांच के दौरान यह भी पता चला कि दोनों ही अधिकारियों ने संदीप शर्मा को लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिया था। जिसके चलते शासन को करोड़ों का नुकसान हुआ।

रिटायर्ड कर्मचारी का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर रुपए निकाले

बाबू संदीप शर्मा ने जनवरी 2025 में एक रिटायर्ड कर्मचारी का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर, फर्जी स्वीकृति आदेश तैयार किया। जिसमें स्वंय संयुक्त संचालक के फर्जी साइन किए, और सेवानिवृत्त कर्मचारी की पत्नी के नाम के स्थान पर अपनी मौसी पुनीता का नाम लिखकर उनका बैंक खाते से करीब 8 लाख 50 हजार रुपए निकाल लिए।

इधर संपरीक्षा विभाग के अपर संचालक ने घोटालेबाज बाबू संदीप शर्मा को 1966 के नियम 9 के तहत लाखों रुपए का घोटाला करने के मामले में निलंबित कर। उसे सागर संपरीक्षा कार्यालय में तैनात किया है। लेकिन घोटाला उजागर होने के बाद से ही वह फरार है।

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