मझौली के ग्राम सुहजनी में मिर्च, शिमला मिर्च और टमाटर की खेती का कृषि अधिकारियों ने किया अवलोकनमुनाफा बढ़ने पर 70 एकड़ में लगाई मिर्च, शिमला मिर्च और टमाटर की फसल

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January 16, 2025

by india Khabar 24

jabalpur

Department of Agriculture, Madhya Pradesh
जिले के मझौली विकासखंड के ग्राम सुहजनी में कृषक सत्येन्द्र सिंह द्वारा की जा रही मिर्च, टमाटर एवं शिमला मिर्च की खेती का आज किसान कल्याण तथा कृषि विकास के अधिकारियों ने जायज़ा लिया। इस दौरान अधिकारियों ने कृषक सत्येन्द्र सिंह से चर्चा की तथा उनके अनुभव जाने। कृषि अधिकारियों ने आस-पास के किसानों से भी गेंहूं और धान की फसल के स्थान पर उद्यानिकी फसलों की खेती करने का आग्रह किया, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके। मिर्च, शिमला मिर्च एवं टमाटर की खेती कर अवलोकन करने पहुंचे अधिकारियों में अनुविभागीय कृषि अधिकारी सिहोरा रवि आम्रवंशी एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी जे एस राठौर शामिल थे।
इस अवसर पर सत्येन्द्र ने बताया कि वे सिकमी की लगभग 70 एकड जमीन पर 50 एकड में मिर्च, 10 एकड में शिमला मिर्च और 10 एकड में टमाटर की खेती कर रहे है। उनके फार्म में छः ट्यूबवेल भी हैं। उन्होंने खेत की तैयारी कर मेड बनाई हैं और उनमें पॉलीथिन की मल्च एवं ड्रिप लगाई है। सत्येन्द्र ने टमाटर की साहो, हरी मिर्च की सुनिधी और शिमला मिर्च की आशा किस्म की फसल लगाई है। मेड़ों के किनारों पर हायब्रिड पीला गेंदा भी लगाया है। जिससे कीट नियंत्रण में मदद मिलती है और अतिरिक्त आय भी प्राप्त होती है।
अनुविभागीय कृषि अधिकारी सिहोरा रवि आम्रवंशी द्वारा गेंदा लगाने का कारण पूछने पर सत्येन्द्र ने बताया कि गेंदे के फूल के पीले रंग से कीट पतंगे आकर्षित होते है और मुख्य फसल को कम नुकसान पहुंचाते है। जिससे एक स्थान पर कीटों को नियंत्रण करने में सुविधा होती है तथा रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग कम होने से खेती की लागत भी कम होती है। कृषक सत्येन्द्र ने बताया की उनके द्वारा इन फसलों की खेती की शुरुआत चार साल पहले की गई थी। शुरू में वह 6 एकड में मिर्च, शिमला मिर्च और टमाटर लगाते थे, जिससे उनको अधिक मुनाफा होता था इस वजह से अब उनके द्वारा रकवा बढ़ाकर 70 एकड कर दिया गया है। कीट नियंत्रण हेतु उन्होंने अल्ट्रा वायलेट ट्रेप लगाये हैं और प्राकृतिक कीट नियंत्रण हेतु वे नीम के तेल का उपयोग करते है।
सत्येंद्र फसलों में कम्पोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल करते हैं। अल्ट्रा वायलेट ट्रेप से रस चूसने वाले छोटे कीट एफिड, जेसिड आदि रात्रि में लाइट की तरफ आकर्षित होते है तथा लाइट के नीचे रखे ट्रे में गिरकर मर जाते हैं। ट्रे में पानी तथा कीटनाशक एवं जला आइल मिक्स कर रखा जाता है। कृषक सत्येन्द्र ने बताया कि, उन्होने फसलो की पौध जुलाई-अगस्त में ट्रांस्प्लान्टिंग की थी और अप्रैल तक इसकी आखिरी तुडाई करते है, कुल 12-15 तुडाई की जाती है। जिसे वे लोकल मार्केट जबलपुर एवं उत्तर प्रदेश के बनारस के बाजार में विक्रय करते है। आसपास के कृषको को भी प्रोत्साहित कर रहे है। इनके खेत में प्रतिदिन 75-80 मजदूर काम कर रहे है। जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिला रहा है।

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January 16, 2025

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